BRICS पर सियासी घमासान: चिदंबरम के फायदे वाले सवाल पर गरमाई राजनीति, BJP का तीखा पलटवार
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भारत में होने वाले ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन से ठीक पहले देश की राजनीति में एक नई बहस छिड़ गई है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री पी. चिदंबरम ने ब्रिक्स की प्रासंगिकता और भारत को होने वाले फायदों पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं, जिसके बाद भारतीय जनता पार्टी ने आक्रामक रुख अपनाते हुए कांग्रेस को घेरा है।

क्या है चिदंबरम का सवाल? पी. चिदंबरम ने कहा कि भारत क्वाड, G20, SCO और ब्रिक्स जैसे कई अंतरराष्ट्रीय मंचों का हिस्सा है, लेकिन इन मंचों से भारत को जमीन पर क्या ठोस फायदा हुआ, यह स्पष्ट नहीं है। उन्होंने तर्क दिया कि पिछले दो-तीन ब्रिक्स सम्मेलनों में ऐसा कुछ भी उल्लेखनीय नहीं दिखा जिसे भारत की बड़ी उपलब्धि माना जाए। हालांकि, उन्होंने यह जरूर माना कि अतीत में इस संगठन से कुछ महत्वपूर्ण परिणाम देखने को मिले थे।

BJP का कांग्रेस पर हमला चिदंबरम के इस बयान पर BJP ने जोरदार पलटवार किया है। पार्टी प्रवक्ता नलिन कोहली ने इस बयान को हैरान करने वाला बताया है। कोहली ने कहा कि जब भारत एक बड़ा अंतरराष्ट्रीय आयोजन करने जा रहा है, तब कांग्रेस का इस तरह का बयान देश की छवि पर सवाल उठाता है। BJP ने पूछा, क्या कांग्रेस कूटनीति को केवल लेन-देन के चश्मे से देखती है? कांग्रेस बताएं कि उनके शासनकाल में विदेश नीति के जरिए उन्होंने कौन सी बड़ी उपलब्धियां हासिल की थीं?

भारत के लिए क्यों अहम है ब्रिक्स? भारत 1 जनवरी 2026 से ब्रिक्स की अध्यक्षता कर रहा है और 12-13 सितंबर को नई दिल्ली में शिखर सम्मेलन का आयोजन होने जा रहा है। इस साल की थीम बिल्डिंग फॉर रेजिलिएंस, इनोवेशन, कोऑपरेशन एंड सस्टेनेबिलिटी रखी गई है। ब्रिक्स के 11 सदस्य देश दुनिया की 49 प्रतिशत आबादी और 40 प्रतिशत वैश्विक जीडीपी का प्रतिनिधित्व करते हैं, जो इसे एक अत्यंत शक्तिशाली आर्थिक और रणनीतिक मंच बनाता है।

दिग्गज नेताओं का होगा जमावड़ा नई दिल्ली में आयोजित होने वाले इस सम्मेलन में दुनिया के कई बड़े नेता हिस्सा लेने वाले हैं। इनमें रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन और दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामफोसा प्रमुख हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी विभिन्न देशों के राष्ट्राध्यक्षों के साथ द्विपक्षीय वार्ता भी करेंगे, जिसे भारत की कूटनीतिक शक्ति बढ़ाने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।

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