BRIC से BRICS तक का सफर: कैसे चार देशों का आर्थिक विचार बना दुनिया का सबसे शक्तिशाली समूह?
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नई दिल्ली का भारत मंडपम एक बार फिर वैश्विक कूटनीति का केंद्र बन गया है। दुनिया के सबसे प्रभावशाली आर्थिक समूहों में से एक, BRICS का 18वां शिखर सम्मेलन यहां शुरू हो रहा है। 11 सितंबर को मीट-ग्रीट के साथ शुरू हुआ यह आयोजन 13 सितंबर तक चलेगा, जिसमें पुतिन समेत कई देशों के राष्ट्राध्यक्षों की उपस्थिति चर्चा का विषय है।

BRIC की शुरुआत: एक अर्थशास्त्री की भविष्यवाणी ब्रिक्स की कहानी किसी अंतरराष्ट्रीय संधि से नहीं, बल्कि एक अर्थशास्त्री की रिपोर्ट से शुरू हुई। साल 2001 में जिम ओ नील ने ब्राजील, रूस, भारत और चीन को दुनिया की उभरती हुई अर्थव्यवस्थाओं के रूप में चिन्हित किया। उन्होंने इन चारों देशों के नाम को जोड़कर BRIC शब्द गढ़ा। उस समय यह केवल एक आर्थिक शब्दावली थी, कोई औपचारिक संगठन नहीं।

सफर की औपचारिक शुरुआत: 2006 साल 2006 में न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान, इन चार देशों के विदेश मंत्रियों ने पहली बार बैठक की। इसका उद्देश्य वैश्विक मंच पर विकासशील देशों की आवाज को मजबूती देना था। 2009 में रूस के येकातेरिनबर्ग में पहला औपचारिक शिखर सम्मेलन हुआ, जिससे यह समूह दुनिया की राजनीति में एक अहम ताकत के रूप में उभरा।

BRIC से BRICS: S का जुड़ना 2010 में दक्षिण अफ्रीका को शामिल करने पर सहमति बनी और 2011 में चीन में आयोजित सम्मेलन में दक्षिण अफ्रीका आधिकारिक तौर पर शामिल हो गया। इसके बाद समूह का नाम BRICS हो गया। समय के साथ इसका विस्तार जारी रहा; 2024 में मिस्र, इथियोपिया, ईरान, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात इसके सदस्य बने। 2025 में इंडोनेशिया के जुड़ने से आज इसमें कुल 11 सदस्य देश हैं।

सदस्य बनाम पार्टनर: क्या है अंतर? वर्तमान में ब्रिक्स में 11 पूर्ण सदस्य और 10 पार्टनर देश शामिल हैं। पूर्ण सदस्यों के पास समूह की निर्णय लेने की प्रक्रिया में पूरा अधिकार होता है। वहीं, 10 पार्टनर देश (जैसे मलेशिया, थाईलैंड, वियतनाम आदि) केवल सहयोग के लिए जुड़े हैं। उन्हें बैठकों में आमंत्रित तो किया जाता है, लेकिन उनके पास नीतिगत फैसले लेने का अधिकार नहीं होता।

भारत की अध्यक्षता और इस साल का एजेंडा भारत इस बार चौथी बार ब्रिक्स की अध्यक्षता कर रहा है। 18वें शिखर सम्मेलन की थीम है— बिल्डिंग फॉर रेजिलेंस, इनोवेशन, को-ऑपरेशन एंड सस्टेनेबिलिटी । इस आयोजन के लिए भारत ने पिछले कुछ महीनों में देश के 25 से अधिक शहरों में करीब 350 बैठकें आयोजित की हैं। भारत की इस अध्यक्षता का मुख्य उद्देश्य समावेशी वैश्विक शासन और साझा प्राथमिकताओं को नई दिशा देना है।

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