डॉक्टर अपराधी नहीं हैं: स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग पर भड़के FAIMA, वाटर कैनन के इस्तेमाल की कड़ी निंदा
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देशभर के मेडिकल कॉलेजों में इंटर्न डॉक्टरों का आक्रोश बढ़ता जा रहा है। अपनी मेहनत के अनुपात में उचित स्टाइपेंड की मांग को लेकर मध्य प्रदेश से लेकर उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर तक जूनियर डॉक्टर सड़कों पर उतर आए हैं। इन भविष्य के डॉक्टरों की मांग है कि उनका मासिक स्टाइपेंड बढ़ाकर 30,000 रुपये किया जाए।

हम अपराधी नहीं, स्वास्थ्य रक्षक हैं प्रदर्शन के दौरान शांतिपूर्ण विरोध कर रहे डॉक्टरों पर वाटर कैनन और बल प्रयोग किए जाने से स्थिति तनावपूर्ण हो गई है। FAIMA (FAIMA Doctors Association) ने इस कार्रवाई की कड़े शब्दों में निंदा की है। संगठन ने दो टूक शब्दों में कहा है कि डॉक्टरों के साथ अपराधियों जैसा व्यवहार करना अस्वीकार्य है। वे स्वास्थ्य प्रणाली की रीढ़ हैं और दिन-रात मरीजों की सेवा में जुटे रहते हैं, उन्हें सम्मान मिलना चाहिए।

क्या है स्टाइपेंड का असली विवाद? देश के अधिकांश सरकारी मेडिकल कॉलेजों में इंटर्न को मिलने वाला भत्ता बेहद कम है। उदाहरण के तौर पर:

डॉक्टर क्यों हैं नाराज? इंटर्न डॉक्टरों का कहना है कि उनकी पढ़ाई और ड्यूटी के घंटों को देखते हुए मौजूदा स्टाइपेंड में गुजारा करना नामुमकिन है। वे इसे बढ़ाकर एक समान रूप से 30,000 रुपये करने की मांग कर रहे हैं। डॉक्टरों का तर्क है कि वे न केवल अस्पताल में सेवाएं देते हैं, बल्कि कठिन प्रशिक्षण प्रक्रिया से भी गुजरते हैं, जिसके लिए उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना जरूरी है।

लोकतांत्रिक अधिकार पर प्रहार FAIMA ने स्पष्ट किया है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना हर नागरिक का लोकतांत्रिक अधिकार है। सरकार को बल प्रयोग के बजाय उनकी जायज मांगों पर बातचीत करनी चाहिए। हाल ही में दिल्ली में FMGE परीक्षा में विसंगतियों के खिलाफ हुए सफल प्रदर्शन के बाद डॉक्टरों का आत्मविश्वास बढ़ा है, और अब वे अपने स्टाइपेंड के अधिकारों के लिए आर-पार की लड़ाई के मूड में हैं।

निष्कर्ष फिलहाल, देश भर के जूनियर डॉक्टर सरकार से एक ठोस नीति और लिखित आश्वासन की प्रतीक्षा कर रहे हैं। यदि स्टाइपेंड के मामले में जल्द समाधान नहीं निकलता है, तो मरीजों की स्वास्थ्य सेवाएं बुरी तरह प्रभावित हो सकती हैं, जिसकी जिम्मेदारी पूरी तरह से प्रशासन की होगी।

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