दिल्ली में काल बनकर खड़ी हैं 42 इमारतें: सत्य निकेतन हादसे के बाद MCD के सर्वे ने खोली पोल
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दिल्ली के सत्य निकेतन में एक 5 मंजिला पीजी (PG) इमारत के ढहने और उसमें 7 लोगों की दर्दनाक मौत ने राजधानी की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस हादसे के बाद दिल्ली नगर निगम (MCD) की नींद खुली और आनन-फानन में एक सर्वे रिपोर्ट सार्वजनिक की गई, जिसमें से 62 इमारतों को अति खतरनाक श्रेणी में रखा गया है।

हादसे के बाद सक्रिय हुआ प्रशासन सर्वे रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली में चिन्हित 62 खतरनाक इमारतों में से अब तक सिर्फ 20 पर ही कार्रवाई हो सकी है। इनमें से 16 को ढहा दिया गया और 4 को सील कर दिया गया है। हैरानी की बात यह है कि 42 इमारतें अभी भी ज्यों की त्यों खड़ी हैं, जो किसी भी वक्त बड़े हादसे को न्यौता दे सकती हैं। प्रशासन अब इन इमारतों के खिलाफ कार्रवाई का दावा कर रहा है।

कागजों पर सिमटा 30 लाख घरों का सर्वे MCD हर साल मानसून से पहले इमारतों की जांच का दावा करता है। इस साल निगम ने 32.55 लाख घरों की जांच का लक्ष्य रखा था, जिसमें से 30.74 लाख घरों की जांच का दावा भी किया गया। कुल 377 मकान मरम्मत की जरूरत वाले पाए गए, जिनमें से अधिकांश पर केवल नजर रखने का नाम देकर खानापूर्ति की जा रही है। सवाल यह है कि जब 62 इमारतें पहले ही खतरनाक घोषित थीं, तो उन पर तुरंत एक्शन क्यों नहीं लिया गया?

50 साल पुरानी नींव पर खड़ी थी 5 मंजिला इमारत सत्य निकेतन हादसा लापरवाही की पराकाष्ठा थी। 55 गज के छोटे से प्लॉट पर 1970 के दशक की जर्जर नींव के ऊपर 5 मंजिलें खड़ी कर दी गई थीं। नियमों के अनुसार वहां केवल ग्राउंड प्लस वन की अनुमति थी, लेकिन बिना किसी नक्शे के बेसमेंट से लेकर चौथी मंजिल तक निर्माण कर दिया गया। बेसमेंट में मरम्मत के दौरान हुई खुदाई और पानी के रिसाव ने अंततः पूरी इमारत को मलबे के ढेर में बदल दिया।

अफसर सस्पेंड, लेकिन जान कौन लौटाएगा? हादसे के बाद पुलिस ने मकान मालिक को राजस्थान से गिरफ्तार किया है। वहीं, मामले में लापरवाही बरतने के आरोप में साउथ जोन के डिप्टी कमिश्नर राकेश कुमार समेत चार इंजीनियरों को सस्पेंड कर दिया गया है। हालांकि, यह प्रशासनिक कार्रवाई उन परिवारों के घावों को भरने के लिए काफी नहीं है जिन्होंने अपने अपनों को खो दिया है।

दिल्ली में बदस्तूर जारी है मौत का सिलसिला सत्य निकेतन कोई इकलौती घटना नहीं है। इससे पहले सैदुलजाब में 6 लोगों की मौत, हौज़ रानी में आग से 23 जानें जाना, मलका गंज और करावल नगर में इमारतों का ढहना यह साबित करता है कि दिल्ली का निर्माण ढांचा (Infrastructure) पूरी तरह से भगवान भरोसे है।

अब सबकी निगाहें बाकी बची उन 42 इमारतों पर हैं, जिन्हें खतरनाक घोषित किया जा चुका है। क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है, या फिर इस बार सच में बुलडोजर चलेगा?

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