डॉक्टरों की पिटाई पड़ी भारी: शिवसेना ने पालघर के 7 नेताओं को किया सस्पेंड
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पालघर में डॉक्टरों के साथ हुई मारपीट के मामले में शिवसेना (शिंदे गुट) ने सख्त रुख अपनाते हुए अपने सात बड़े पदाधिकारियों को पार्टी से निलंबित कर दिया है। मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के निर्देश पर यह अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई है।

किन्हें दिखाया गया बाहर का रास्ता? पार्टी द्वारा जारी प्रेस रिलीज के अनुसार, निलंबन की गाज जिन नेताओं पर गिरी है, उनमें पालघर जिला प्रमुख कुंदन बालकृष्ण संखे और शहर प्रमुख राहुल रामदास घरत मुख्य रूप से शामिल हैं। इसके अलावा मनीष उर्फ विक्की संखे, साईराज पाटिल, रोहित गावी, राहुल संखे और ऋषभ वारे का नाम भी सूची में है। इन सभी पर अनुशासनहीनता के गंभीर आरोप हैं।

क्या है पूरा मामला? विवाद की शुरुआत पालघर के रिलीफ अस्पताल से हुई। आरोप है कि दही हांडी (गोविंदा) के दौरान घायल हुए प्रतिभागियों के इलाज के बिल को लेकर शिवसेना कार्यकर्ताओं ने अस्पताल में बवाल काटा। रविवार तड़के करीब 20 लोगों का समूह जबरन आईसीयू और कैजुअल्टी वार्ड में घुस गया।

डॉक्टरों को धमकाया, मरीज को जबरन ले गए शिकायत के मुताबिक, शिवसेना शहर प्रमुख राहुल घरत ने अस्पताल के कर्मचारी को थप्पड़ मारा। वहीं, जिला प्रमुख कुंदन संखे और अन्य लोगों ने ऑन-ड्यूटी डॉक्टरों को धमकाया और भर्ती मरीज को जबरन अस्पताल से बाहर निकाल ले गए। यह घटना अस्पताल के बिलिंग काउंटर पर काम करने वाले विवेक बाबुलिंगा की शिकायत के बाद सामने आई।

पुलिस की कार्रवाई और गिरफ्तारी इस मामले में पुलिस पहले ही एक्शन मोड में है। शिवसेना के शहर प्रमुख राहुल घरत को गिरफ्तार कर स्थानीय मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया था, जहां से उन्हें एक दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया गया। पुलिस ने कुल 17 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है, जिनमें स्थानीय विधायक राजेंद्र गावित के बेटे रोहित का नाम भी शामिल है।

कानूनी शिकंजा आरोपियों पर भारतीय न्याय संहिता और महाराष्ट्र मेडिकेयर सर्विस पर्सन्स एंड मेडिकेयर सर्विस इंस्टीट्यूशंस अधिनियम के तहत केस दर्ज किया गया है। पुलिस ने मारपीट, धमकी देने, अनधिकृत प्रवेश और गैरकानूनी रूप से जमा होने जैसी संगीन धाराएं लगाई हैं। अन्य फरार आरोपियों की तलाश के लिए छापेमारी जारी है।

सुप्रीम कोर्ट की नाराजगी इस घटना ने सुप्रीम कोर्ट का भी ध्यान खींचा है। हाल ही में डॉक्टरों की सुरक्षा से जुड़े एक मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा, हालात बद से बदतर होते जा रहे हैं। बार-बार डॉक्टरों पर हमले हो रहे हैं, यह स्थिति चिंताजनक है।

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