देश में आरक्षण का मुद्दा एक बार फिर गरमा गया है। केरल के मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन ने दलित ईसाइयों को अनुसूचित जाति (SC) का दर्जा और आरक्षण देने का वादा किया है। इस बयान के बाद सियासत तेज हो गई है, और हिंदू संगठनों के साथ-साथ भाजपा ने भी इसे तुष्टीकरण की राजनीति करार दिया है।
आरक्षण का आधार और विवाद दलित ईसाई वे लोग हैं जो कभी हिंदू अनुसूचित जाति समुदाय का हिस्सा थे, लेकिन बाद में उन्होंने ईसाई धर्म अपना लिया। इनका तर्क है कि धर्म परिवर्तन के बावजूद समाज में उन्हें आज भी भेदभाव का सामना करना पड़ता है। केरल में उन्हें फिलहाल ओबीसी (OBC) श्रेणी में आरक्षण मिलता है, लेकिन अब वे SC दर्जे की मांग कर रहे हैं।
संविधान क्या कहता है? भारतीय संविधान का अनुच्छेद 341 आरक्षण का आधार तय करता है। 1950 के राष्ट्रपति आदेश के अनुसार, केवल हिंदू धर्म को मानने वाले ही SC आरक्षण के दायरे में आते थे। बाद में इसमें सिख और बौद्ध धर्म को भी जोड़ा गया। हालांकि, ईसाई और मुस्लिम धर्मों को साफ तौर पर इस सूची से बाहर रखा गया है।
सुप्रीम कोर्ट का कड़ा रुख न्यायपालिका ने कई बार स्पष्ट किया है कि यदि कोई व्यक्ति अनुसूचित जाति श्रेणी से ईसाई या इस्लाम धर्म अपनाता है, तो उसका SC संवैधानिक दर्जा स्वतः समाप्त हो जाता है। मार्च और जुलाई में सुप्रीम कोर्ट ने इस पर अपनी मुहर लगाते हुए कहा कि संविधान में इस प्रतिबंध को लेकर कोई अस्पष्टता नहीं है और इसे बदलने की कोई गुंजाइश नहीं है।
मद्रास हाईकोर्ट की तल्ख टिप्पणी मद्रास हाईकोर्ट ने भी एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा कि जिन धर्मों ने सदियों तक यह प्रचार किया कि उनके यहां सामाजिक समानता है, वे अब यह दावा नहीं कर सकते कि उनके भीतर भी जातिगत ऊंच-नीच है। अदालत ने धर्म परिवर्तन के बाद आरक्षण की मांग को तर्कहीन बताया है।
राजनीतिक दांव या वोट बैंक? विशेषज्ञों का मानना है कि केरल के मुख्यमंत्री का यह वादा कानूनी रूप से लागू करना नामुमकिन है। SC आरक्षण का ढांचा बदलने के लिए संसद में 1950 के आदेश में संशोधन करना होगा। आलोचकों का कहना है कि यह कदम न केवल मौजूदा SC समुदाय के अधिकारों में सेंध लगाएगा, बल्कि यह धर्मांतरण को बढ़ावा देने का एक तरीका भी हो सकता है।
क्या केरल सरकार का यह वादा महज एक सियासी जुमला है या यह देश में एक नई बहस को जन्म देगा? फिलहाल, संवैधानिक प्रावधानों और अदालती फैसलों के सामने यह घोषणा एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।
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— Zee News (@ZeeNews) September 2, 2026
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