45 साल का बेमिसाल सफर: पूर्व मुख्य सचिव रत्नाप्रभा ने याद की ट्रेनिंग के दिनों की वो पहली तारीख
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भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) में 45 साल का सफर पूरा करना किसी भी अधिकारी के लिए बड़ी उपलब्धि है। कर्नाटक की पूर्व मुख्य सचिव और 1981 बैच की वरिष्ठ आईएएस अधिकारी रत्नाप्रभा ने इस खास मौके पर अपने करियर की पुरानी यादों को ताजा किया है। सोशल मीडिया पर साझा की गई उनकी पोस्ट न केवल भावुक है, बल्कि प्रेरणा से भी भरी है।

1 सितंबर 1981: मसूरी से शुरू हुई गौरवगाथा रत्नाप्रभा के लिए 1 सितंबर का दिन बेहद खास है। 45 साल पहले इसी दिन उन्होंने लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी (LBSNAA), मसूरी में रिपोर्ट किया था। उन्होंने अपनी पुरानी तस्वीरों के साथ लिखा कि यह तारीख उनकी जिंदगी का सबसे यादगार मोड़ है। मसूरी के उन शुरुआती दिनों से शुरू हुआ उनका सफर देश के सर्वोच्च प्रशासनिक पदों तक पहुंचा।

प्रशासन के शिखर तक का सफर 1981 बैच की अधिकारी के रूप में, रत्नाप्रभा ने कर्नाटक और केंद्र सरकार में कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभालीं। वे राज्य की मुख्य सचिव के पद तक पहुंचीं। इसके अलावा, महिला और बाल विकास मंत्रालय में अपनी सेवाएं देते हुए उन्होंने राष्ट्रीय महिला सशक्तिकरण मिशन (NMEW) की मिशन निदेशक के रूप में महिला कल्याण के लिए ऐतिहासिक काम किए।

रिटायर्ड बट नॉट टायर्ड : सेवा का नया अध्याय सेवानिवृत्ति के बाद जहां कई लोग शांत जीवन चुनते हैं, रत्नाप्रभा ने रिटायर्ड बट नॉट टायर्ड (रिटायर हुए हैं, थके नहीं) का मंत्र अपनाया है। वर्तमान में वे उबंटू कंसोर्टियम की अध्यक्ष के रूप में सक्रिय हैं। यह संगठन महिला उद्यमियों को सशक्त बनाने और उन्हें आर्थिक रूप से आगे बढ़ाने का काम कर रहा है।

नए अधिकारियों के लिए एक मिसाल रत्नाप्रभा का प्रशासनिक करियर यह साबित करता है कि लोक सेवा केवल कुर्सी और पद तक सीमित नहीं होती। उनका 45 वर्षों का अनुभव आज के युवाओं और महिला उद्यमियों के लिए एक बड़ा सबक है। यह कहानी सिखाती है कि प्रशासनिक सीमाओं से परे जाकर समाज के प्रति अपना समर्पण कैसे आजीवन बनाए रखा जा सकता है। उनका जज्बा आज भी यह संदेश देता है कि सेवा की भावना कभी रिटायर नहीं होती।

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