राजद प्रमुख लालू यादव की बेटी और नेत्री रोहिणी आचार्य ने बिहार सरकार के विकास के दावों पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने बुधवार (02 सितंबर, 2026) को एक तीखे हमले में राज्य में निवेश की बदहाल स्थिति को लेकर सरकार को घेरा है।
नीति आयोग की रिपोर्ट से खुली पोल रोहिणी आचार्य ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर नीति आयोग की जुलाई 2026 में जारी इन्वेस्टमेंट फ्रेंडलीनेस इंडेक्स 2026 रिपोर्ट का हवाला दिया है। उन्होंने दावा किया कि बिहार निवेश आकर्षित करने और औद्योगिक आधार तैयार करने में पूरी तरह विफल रहा है।
देश में सबसे फिसड्डी बिहार रिपोर्ट के आंकड़ों के अनुसार, 100 अंकों के पैमाने पर बिहार को मात्र 41.2 अंक मिले हैं। देश के 17 बड़े राज्यों की सूची में बिहार 17वें यानी सबसे आखिरी स्थान पर है। वहीं, सभी 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में बिहार 26वें स्थान पर रहा है।
सरकारी दावों पर प्रहार रोहिणी का आरोप है कि राज्य में पिछले 21 वर्षों से एनडीए की सरकार है, लेकिन इसके बावजूद यहां ईज ऑफ डूइंग बिजनेस का सपना साकार नहीं हो सका। उन्होंने कहा कि सत्ता में इतने लंबे समय तक रहने के बाद भी राज्य का यह प्रदर्शन विकास के खोखले दावों की सच्चाई बयां करता है।
निवेश की राह में रोड़े रिपोर्ट के अनुसार, बिहार में निवेश न आने के मुख्य कारणों में भ्रष्ट नौकरशाही, लालफीताशाही और सरकारी प्रक्रियाओं में भारी देरी शामिल है। इसके अलावा, आधारभूत संरचना की कमी, जमीन आवंटन की जटिल प्रक्रिया और सीमित रोजगार के अवसर भी राज्य के पिछड़ने का बड़ा कारण बने हैं।
औद्योगिक वातावरण का अभाव रोहिणी आचार्य ने कहा कि सरकार ने लंबे समय तक सत्ता तो संभाली, लेकिन राज्य में ऐसा कोई माहौल नहीं बनाया जिससे निवेशक यहां अपना व्यापार स्थापित कर सकें। पेटेंट और नवाचार के मामलों में भी बिहार लगातार पिछड़ रहा है, जिसका सीधा असर राज्य की अर्थव्यवस्था और युवाओं के रोजगार पर पड़ रहा है।
बिहार के विकास के दावों की पोल खोलती नीति आयोग की रिपोर्ट ..
— Rohini Acharya (@RohiniAcharya2) September 2, 2026
नीति आयोग के ‘इन्वेस्टमेंट फ्रेंडलीनेस इंडेक्स 2026’ में बिहार का प्रदर्शन पिछले 21 वर्षों से सत्ता में काबिज एनडीए सरकार के विकास मॉडल पर गंभीर सवाल खड़े करता है। 100 में महज 41.2 अंक के साथ बिहार 17 बड़े राज्यों में… pic.twitter.com/SCiyrTBflA
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