ओवैसी के किले में सेंध: एक हफ्ते में दो बड़े झटकों से चरमराई AIMIM की यूपी रणनीति
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उत्तर प्रदेश की सियासत में आगामी 2027 विधानसभा चुनाव से पहले हलचल तेज हो गई है। असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM को महज सात दिनों के भीतर दो बड़े झटकों का सामना करना पड़ा है। पार्टी के दो कद्दावर चेहरे एक-एक कर साथ छोड़ गए हैं, जिससे पार्टी का संगठन गहरे संकट में घिर गया है।

पहले साइकिल पर सवार हुए डॉ. मन्नान

AIMIM के लिए पहला बड़ा झटका तब लगा जब ओवैसी के करीबी माने जाने वाले डॉ. अब्दुल मन्नान ने पार्टी को अलविदा कह दिया। उन्होंने सपा प्रमुख अखिलेश यादव की मौजूदगी में समाजवादी पार्टी का दामन थाम लिया। देवीपाटन इलाके में मजबूत पकड़ रखने वाले मन्नान का जाना ओवैसी के लिए एक बड़ा रणनीतिक नुकसान माना जा रहा है।

अब हाथ के साथ आसिम वकार का नया सफर

अभी डॉ. मन्नान के जाने की चर्चा थमी भी नहीं थी कि पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता और टीवी डिबेट्स का प्रमुख चेहरा आसिम वकार ने कांग्रेस का हाथ थाम लिया। दिल्ली में कांग्रेस नेताओं—अजय राय और इमरान प्रतापगढ़ी की मौजूदगी में उन्होंने पार्टी की सदस्यता ली। आसिम वकार का जाना ओवैसी के लिए इसलिए भी बड़ी चुनौती है क्योंकि वे मीडिया में पार्टी का सबसे मुखर चेहरा थे।

ओवैसी पर बरसे वकार, उठाए गंभीर सवाल

पार्टी छोड़ने के बाद आसिम वकार ने पुरानी लीडरशिप पर तीखे हमले किए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि AIMIM का नेतृत्व कहने के लिए तो बीजेपी का विरोध करता है, लेकिन जमीनी स्तर पर उनका पूरा जोर उन विपक्षी दलों को हराने में होता है जो वास्तव में बीजेपी के खिलाफ लड़ रहे हैं। वकार ने कहा कि वे इस विरोधाभासी राजनीति से हताश थे।

क्या 2027 में कमजोर पड़ेगा ओवैसी का प्रभाव?

यूपी के मुस्लिम वोट बैंक को लेकर समाजवादी पार्टी और कांग्रेस दोनों ही आक्रामक रुख अपनाए हुए हैं। एक तरफ जहां प्रमुख चेहरे पार्टी छोड़ रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ विपक्षी दल इस खाली जगह को भरने के लिए सक्रिय हो गए हैं। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ओवैसी ने समय रहते अपने संगठन को नहीं संभाला, तो 2027 के चुनाव में उनकी यूपी में पकड़ और कमजोर हो सकती है।

क्या AIMIM इन दिग्गज नेताओं की कमी को पूरा कर पाएगी या यह बिखराव चुनाव तक पार्टी को हाशिए पर ला खड़ा करेगा? यह आने वाले समय में स्पष्ट होगा।

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