कश्मीरी पंडितों को धमकी: फारूक अब्दुल्ला का बड़ा आरोप, कहा- यह स्टेटहुड छीनने की साजिश
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जम्मू-कश्मीर में कश्मीरी पंडितों को मिल रही धमकियों के मामले ने राजनीतिक तूल पकड़ लिया है। नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला ने इन घटनाओं को एक सोची-समझी साजिश करार दिया है। उन्होंने प्रशासन पर निशाना साधते हुए गंभीर सवाल उठाए हैं।

सिर्फ पंडितों को ही निशाना क्यों? फारूक अब्दुल्ला ने धमकियों की निष्पक्षता पर सवाल उठाया है। उन्होंने कहा, यहां केवल कश्मीरी पंडित ही नहीं, बल्कि बाहर से आए कई हिंदू अधिकारी भी तैनात हैं। डीजी, एसपी और अन्य उच्च पदों पर बैठे हिंदू अधिकारियों को धमकी क्यों नहीं मिल रही? यह भेदभाव और चुनिंदा निशाना बनाए जाने का मामला है।

स्टेटहुड से रोकने का हथकंडा अब्दुल्ला का आरोप है कि प्रदेश में डर का माहौल जानबूझकर बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा, यह सब जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा (स्टेटहुड) बहाल करने से रोकने की एक साजिश है। सरकार दुनिया को दिखा रही है कि सब कुछ शांत है और आतंकवाद खत्म हो चुका है, तो फिर ये धमकियां कहां से आ रही हैं?

LG प्रशासन को घेरा नेशनल कॉन्फ्रेंस प्रमुख ने सीधे तौर पर उपराज्यपाल (LG) मनोज सिन्हा के प्रशासन को कठघरे में खड़ा किया। उन्होंने कड़े शब्दों में कहा, पूरी पुलिस और सुरक्षा तंत्र LG के अधीन है। फिर भी ये हमले और धमकियां जारी हैं। मैं आरोप लगाता हूं कि धमकियां देने वाले यही लोग हो सकते हैं। अगर बॉर्डर सुरक्षित है, तो घुसपैठ और हमले कैसे हो रहे हैं?

PoK पर भी रखी राय पीओके (PoK) के हालातों पर प्रतिक्रिया देते हुए अब्दुल्ला ने कहा कि वहां रह रहे लोग भी हमारे भाई हैं। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं की चुप्पी पर सवाल उठाते हुए कहा कि संयुक्त राष्ट्र और उसकी मानवाधिकार शाखा को वहां के हालात पर ध्यान देना चाहिए, लेकिन फिलहाल इस मोर्चे पर वैश्विक स्तर पर कोई ठोस पहल नहीं हो रही है।

यासीन मलिक पर टिप्पणी इस दौरान फारूक अब्दुल्ला ने यासीन मलिक और उनकी पत्नी मुशाल हुसैन के तलाक के मामले पर भी संक्षिप्त टिप्पणी की। उन्होंने इस निजी पारिवारिक घटना पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताया।

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