सुप्रीम कोर्ट का ब्रह्मास्त्र : अनुच्छेद 142 के जरिए रद्द कीं छात्रों पर दर्ज 129 FIR, जानें क्या है यह खास ताकत
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सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला मई 2026 से जारी छात्र आंदोलन और NEET-UG पेपर लीक विवाद के बीच सुप्रीम कोर्ट ने एक बड़ा फैसला सुनाया है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने संविधान के अनुच्छेद 142 का इस्तेमाल करते हुए आंदोलन से जुड़ी 129 एफआईआर रद्द कर दी हैं। हजारों छात्रों के लिए यह फैसला बड़ी राहत लेकर आया है।

आंदोलन की पृष्ठभूमि: कॉकरोच जनता पार्टी से सड़कों तक पूरे विवाद की शुरुआत मई 2026 में हुई, जब चीफ जस्टिस सूर्यकांत की एक टिप्पणी को बेरोजगार युवाओं की तुलना समाज पर बोझ बनने वाले कॉकरोच से की गई। इसके विरोध में युवाओं ने कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) का गठन किया। बाद में, NEET-UG पेपर लीक मामले ने इस विरोध को देशव्यापी बना दिया। SFI, AISA और AISF जैसे छात्र संगठनों ने शिक्षा मंत्री के इस्तीफे और परीक्षा प्रणाली में सुधार की मांग के साथ जंतर-मंतर से लेकर पूरे देश में प्रदर्शन किया।

सरकार ने मानी थीं शर्तें, पर FIR नहीं हुई वापस 25 जुलाई को सरकार ने छात्रों की मांगें मानते हुए तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा स्वीकार कर लिया था। हालांकि, विरोध प्रदर्शनों के दौरान छात्रों पर दर्ज हुई एफआईआर वापस नहीं ली गई थीं। सरकार के इस वादे से पीछे हटने के कारण छात्र असमंजस में थे, जिसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा।

क्या है अनुच्छेद 142? (अदालत की असाधारण शक्ति) कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, अनुच्छेद 142 सुप्रीम कोर्ट को पूर्ण न्याय (Complete Justice) करने का अधिकार देता है। यदि सामान्य कानून किसी मामले में न्याय सुनिश्चित करने में विफल रहते हैं, तो सुप्रीम कोर्ट इस अनुच्छेद का उपयोग करके ऐसा आदेश दे सकता है जो देश का कानून बन जाता है। अयोध्या भूमि विवाद जैसे ऐतिहासिक मामलों में भी इसी शक्ति का उपयोग किया गया है।

कोर्ट का आदेश: किसे मिली राहत, किसे नहीं? मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की बेंच ने दिल्ली, असम, पश्चिम बंगाल और बिहार समेत पांच राज्यों में दर्ज 129 एफआईआर को तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि छात्रों के भविष्य को देखते हुए अब इन मामलों में कोई भी कार्रवाई नहीं होगी।

हालांकि, कोर्ट ने एक शर्त भी रखी है। जिन व्यक्तियों का पहले से कोई आपराधिक रिकॉर्ड रहा है, उन पर राहत लागू नहीं होगी। ऐसे करीब 2,873 लोग कानून के दायरे में बने रहेंगे। साथ ही, कोर्ट ने आंदोलन में जान गंवाने वाले छात्रों के परिवारों को तीन महीने के भीतर मुआवजा देने का भी आदेश दिया है।

छात्रों के लिए क्या बदलेगा? इस फैसले के बाद छात्रों का आपराधिक रिकॉर्ड साफ हो गया है। अब उन्हें सरकारी नौकरियों के आवेदन, पासपोर्ट वेरिफिकेशन या अन्य किसी भी कानूनी प्रक्रिया में एफआईआर का सामना नहीं करना पड़ेगा। लंबे समय से चल रही कानूनी तलवार अब हट चुकी है, जिससे छात्रों का भविष्य सुरक्षित हो गया है।

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