बुर्का उतारो वरना एंट्री नहीं : कूपर अस्पताल में विवाद, एडवोकेट ने BMC अस्पतालों के निरीक्षण का किया ऐलान
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मुंबई के कूपर अस्पताल में बुर्का पहनकर मैटरनिटी वार्ड में प्रवेश करने से रोके जाने का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद एडवोकेट जहां आरा ने अस्पताल प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।

क्या है पूरा मामला? एडवोकेट जहां आरा अपने रिश्तेदारों से मिलने कूपर अस्पताल पहुंची थीं। उनका आरोप है कि सुरक्षाकर्मियों ने उन्हें बुर्का पहने होने के कारण अंदर जाने से रोक दिया। उन्होंने साफ किया कि उनका चेहरा ढका हुआ नहीं था और उन्होंने अपनी पहचान भी बताई, लेकिन कर्मचारियों ने शर्त रखी कि बुर्का उतारने पर ही प्रवेश मिलेगा।

अस्पताल का तर्क बनाम एडवोकेट का सवाल अस्पताल प्रशासन ने सुरक्षा का हवाला देते हुए तर्क दिया कि बुर्के की आड़ में बच्चे चोरी होने की आशंका रहती है। इस पर एडवोकेट जहां आरा ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि अगर बुर्के में बच्चे चोरी हो रहे हैं, तो यह सुरक्षा व्यवस्था की नाकामी है, न कि बुर्का पहनने वाली महिलाओं का दोष। उन्होंने इसे अपनी गरिमा, निजता और संवैधानिक धार्मिक स्वतंत्रता का उल्लंघन बताया।

BMC अस्पतालों में निरीक्षण का ऐलान इस मामले को लेकर एडवोकेट जहां आरा ने सख्त रुख अपना लिया है। उन्होंने चेतावनी दी है कि वे अब BMC द्वारा संचालित सभी अस्पतालों का दौरा करेंगी। वे यह जांचेंगी कि किस-किस अस्पताल में इस तरह का भेदभावपूर्ण नियम लागू है। उन्होंने साफ कहा कि जहां भी बुर्के के नाम पर महिलाओं के अधिकारों का हनन होगा, वे वहां उनके साथ खड़ी नजर आएंगी।

सुरक्षा बनाम धार्मिक स्वतंत्रता: विशेषज्ञों की राय मामले पर राजनीतिक विश्लेषक डॉ. शालिनी अली का कहना है कि संविधान हर नागरिक को धार्मिक स्वतंत्रता देता है, लेकिन कोई भी स्वतंत्रता कानून और सुरक्षा से ऊपर नहीं है। उन्होंने कहा, बुर्के का सम्मान होना चाहिए, लेकिन यदि किसी पहनावे का दुरुपयोग अपराध छिपाने या सुरक्षा में सेंध लगाने के लिए किया जाता है, तो प्रशासन को निष्पक्ष जांच का अधिकार है।

डॉ. अली ने जोर दिया कि मुद्दा किसी धर्म या समुदाय का नहीं, बल्कि व्यवस्था के दुरुपयोग को रोकने का है। उन्होंने कहा कि देश की सुरक्षा और महिलाओं की गरिमा, दोनों समान रूप से महत्वपूर्ण हैं।

फिलहाल, इस घटना ने मुंबई के स्वास्थ्य संस्थानों में सुरक्षा प्रोटोकॉल और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के बीच एक बड़ी बहस छेड़ दी है। अब सभी की निगाहें एडवोकेट जहां आरा के प्रस्तावित निरीक्षण और BMC प्रशासन के आगामी कदमों पर टिकी हैं।

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