तख्तापलट के दो साल बाद खामोशी टूटी: शेख हसीना का छलका दर्द, कहा- यह वह बांग्लादेश नहीं जिसे हमने बनाया
News Image

दिल्ली स्थित फॉरेन कॉरेस्पोंडेंट्स क्लब में एक वर्चुअल संबोधन के जरिए बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने दो साल के लंबे मौन को तोड़ा है। इस दौरान वे बेहद भावुक नजर आईं और कई बार उनकी आवाज लड़खड़ा गई।

पिता और परिवार की याद में भावुक हुईं हसीना भाषण की शुरुआत करते ही शेख हसीना की आंखें नम हो गईं। उन्होंने कहा, आज मैं सिर्फ एक पूर्व प्रधानमंत्री के रूप में नहीं, बल्कि राष्ट्रपिता बंगबंधु शेख मुजीबुर रहमान की बेटी के तौर पर आपसे बात कर रही हूं। इस दौरान उन्होंने 1975 में अपने परिवार के सदस्यों की हुई नृशंस हत्याओं को याद कर अपना दर्द साझा किया।

यह छात्रों का शांतिपूर्ण आंदोलन नहीं था जुलाई-अगस्त 2024 की घटनाओं पर अपना रुख स्पष्ट करते हुए हसीना ने कहा कि यह कोई शांतिपूर्ण छात्र आंदोलन नहीं था। उन्होंने आरोप लगाया कि सुधार की आड़ में कुछ संगठित समूहों ने छात्रों की मांगों को एक हिंसक राजनीतिक हथियार में बदल दिया था। उन्होंने दावा किया कि उनकी सरकार ने शुरुआत में धैर्य और बातचीत के जरिए इसे सुलझाने की पूरी कोशिश की थी।

झूठा प्रोपेगैंडा फैलाया गया शेख हसीना ने जोर देकर कहा कि जिस बांग्लादेश के लिए 1971 में 30 लाख लोगों ने बलिदान दिया था, आज का बांग्लादेश उससे बिल्कुल अलग है। उन्होंने कहा कि असली छात्रों को बहकाया गया और कुछ निहित स्वार्थी समूहों ने अपने एजेंडे के लिए उनका इस्तेमाल किया। उन्होंने इस पूरी घटनाक्रम को एक झूठा प्रोपेगैंडा करार दिया।

मुहम्मद यूनुस की सरकार पर गंभीर सवाल पूर्व प्रधानमंत्री ने बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के मुखिया मुहम्मद यूनुस पर सीधा हमला बोला। उन्होंने पुलिसकर्मियों के हत्यारों को सुरक्षा (इंडेम्निटी) दिए जाने के फैसले पर सवाल उठाते हुए इसे सरकार का असली मकसद बताया। हसीना ने कहा कि उन्होंने इस मामले की जांच शुरू की थी, जिसे यूनुस की गैर-कानूनी सरकार ने रोक दिया। उन्होंने पूछा, अगर उन्हें सच से डर नहीं था, तो उन्होंने जांच को आगे क्यों नहीं बढ़ने दिया?

दो साल पहले का वो घटनाक्रम गौरतलब है कि ठीक दो साल पहले, 5 अगस्त 2024 को शेख हसीना को बांग्लादेश छोड़ना पड़ा था। आरक्षण के खिलाफ शुरू हुआ छात्रों का प्रदर्शन कुछ ही दिनों में सरकार विरोधी हिंसक आंदोलन में बदल गया था। स्थिति बेकाबू होने के बाद शेख हसीना ने इस्तीफा दे दिया था और उन्हें देश छोड़कर बाहर जाना पड़ा था। आज दो साल बाद, उनकी यह पहली बड़ी प्रतिक्रिया बांग्लादेश के मौजूदा सियासी हालात पर एक बड़ा सवाल खड़ा करती है।

कुछ अन्य वेब स्टोरीज

Story 1

बीजेपी को बड़ा झटका! टीएमसी में घर वापसी की तैयारी में 3 सांसद, बिगड़ेगा एनडीए का गणित

Story 1

जंतर-मंतर पर थी बड़ी साजिश? ISI के आतंकी मॉड्यूल का भंडाफोड़, 9 गिरफ्तार

Story 1

बरेली में मौत का तांडव: तेज रफ्तार कार ने बाइक को बनाया खिलौना, 500 मीटर तक सड़क पर उठीं चिंगारियां

Story 1

महबूबा मुफ्ती आतंकी हैं : गिरिराज सिंह का तीखा हमला, अनुच्छेद 370 पर छिड़ी नई जंग

Story 1

बांकीपुर उपचुनाव: क्या कुत्ता-बिल्ली वाले विवादित बयान पर प्रशांत किशोर ने रची झूठी कहानी?

Story 1

Realme का धमाका: 7000mAh बैटरी वाला सस्ता 5G फोन 12 अगस्त को होगा लॉन्च

Story 1

संसद का मानसून सत्र: विपक्ष का जोरदार हंगामा, अमित शाह के बयान और पेलेट गन विवाद पर घमासान

Story 1

विजय सरकार का पहला बजट: दुल्हनों को 8 ग्राम सोना, छात्रों को लैपटॉप और युवाओं के लिए एआई मिशन का तोहफा

Story 1

लाल सागर में तिरंगे पर हमला: हूती विद्रोहियों की चुप्पी और गहराता रहस्य

Story 1

संसद का अपमान कर रही सरकार, प्रधानमंत्री और गृह मंत्री जवाब दें: मल्लिकार्जुन खड़गे