लाल सागर में तिरंगे पर हमला: हूती विद्रोहियों की चुप्पी और गहराता रहस्य
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लाल सागर में भारतीय झंडे वाले जहाज ‘फैज-ए-नूर-ए-औलिया’ पर हुए घातक हमले ने वैश्विक सुरक्षा चिंताओं को बढ़ा दिया है। सऊदी अरब के निकट से गुजर रहे इस जहाज को निशाना बनाकर डुबो दिया गया। हालांकि, राहत की बात यह है कि जहाज पर सवार सभी 14 नाविकों (13 भारतीय और 1 विदेशी) को सुरक्षित निकाल लिया गया है।

धमाके के बाद जहाज में लगी आग

सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में जहाज से काले धुएं का गुबार उठता साफ देखा जा सकता है, जो किसी शक्तिशाली विस्फोटक हमले की पुष्टि करता है। भारत सरकार ने इस घटना की कड़ी निंदा की है। विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि लाल सागर और होर्मुज में व्यापारिक जहाजों पर हमले तत्काल बंद होने चाहिए और समुद्री आवाजाही की सुरक्षा सुनिश्चित करना अनिवार्य है। फिलहाल रेस्क्यू किए गए भारतीय नाविक सुरक्षित हैं और उन्हें वापस लाने की प्रक्रिया जारी है।

क्यों हूती विद्रोहियों पर है शक की सुई?

हमले वाली जगह यमन के हुदैदा बंदरगाह से मात्र 24 किलोमीटर दूर है, जो हूती विद्रोही संगठन ‘अंसार अल्लाह’ का गढ़ है। हूती गुट ने 20 जुलाई को लाल सागर में नौसैनिक घेराबंदी का ऐलान किया था और सऊदी अरब से जाने वाले जहाजों को निशाना बनाने की धमकी दी थी।

विशेषज्ञों और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि इस हमले में हूती गुट की ‘तूफान’ ड्रोन बोट का इस्तेमाल किया गया। इन रिमोट-संचालित नावों में 1500 किलोग्राम तक विस्फोटक भरा जा सकता है। सबसे बड़ा सवाल हूती गुट की रहस्यमय चुप्पी है; आमतौर पर हर छोटी गतिविधि पर दावा करने वाला यह संगठन इस बार पूरी तरह खामोश है।

क्या यह किसी गलतफहमी का नतीजा था?

वॉशिंगटन इंस्टिट्यूट फॉर नियर ईस्ट पॉलिसी की रिपोर्ट के अनुसार, हूती विद्रोही उन जहाजों को संदेह की दृष्टि से देखते हैं जो अपनी पहचान छिपाने के लिए ‘आइडेंटिफिकेशन सिस्टम’ बंद कर देते हैं। भारतीय जहाज के नाविकों ने भी सुरक्षा कारणों से अपना सिस्टम बंद रखा था, जिसके चलते शायद हूती लड़ाकों ने इसे निशाना बना लिया।

क्या यह जानबूझकर किया गया हमला था या किसी बड़ी गलती का परिणाम? यह तो भारत सरकार की आधिकारिक जांच के बाद ही स्पष्ट होगा।

समुद्री सुरक्षा और तेल संकट पर क्या है अपडेट?

इस तनाव के बीच दुनिया के लिए एक उम्मीद की किरण भी जगी है। अमेरिका, ईरान और ओमान के बीच एक अंतरिम समझौते पर सहमति बनती दिख रही है। इस योजना के तहत अगले 60 दिनों तक होर्मुज स्ट्रेट को पूरी तरह खुला रखने और किसी भी तरह की सैन्य घेराबंदी न करने का प्रस्ताव है। यदि यह शांति योजना सफल रहती है, तो तेल आपूर्ति की समस्या से जूझ रही दुनिया को बड़ी राहत मिल सकती है।

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