पटना के बांकीपुर उपचुनाव में प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी की जीत ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। इस जीत के पीछे जिस कुत्ता-बिल्ली वाले बयान का सबसे ज्यादा शोर रहा, अब वही बयान सवालों के घेरे में है। क्या यह जीत किसी ठोस मुद्दे पर थी या मात्र एक गढ़े हुए झूठ के नैरेटिव पर?
चुनाव प्रचार के दौरान प्रशांत किशोर ने हर मंच से एक ही दावा किया—बीजेपी के एक बड़े नेता ने कहा है कि हम बांकीपुर में कुत्ता-बिल्ली को भी खड़ा कर देंगे तो वह जीत जाएगा। पीके ने इस बयान को बांकीपुर की जनता के स्वाभिमान से जोड़ दिया। उन्होंने जनता को बार-बार याद दिलाया कि जिस पार्टी को आपने 31 साल जिताया, वह आपको कुत्ता-बिल्ली समझती है। यह दांव इतना सटीक बैठा कि बीजेपी इसका असर चुनाव खत्म होने तक समझ ही नहीं पाई।
इस बयान के पीछे का सच तब खुला जब एक यूट्यूबर ने दावा किया कि यह बात रविशंकर प्रसाद ने कही थी। सोशल मीडिया पर यह दावा आग की तरह फैला। बाद में, अपनी गलती का अहसास होने पर उस यूट्यूबर को अपना वीडियो हटाना पड़ा और माफी मांगनी पड़ी। उसने स्वीकार किया कि बिना पुष्टि किए लोगों की सुनी-सुनाई बातों पर उसने रविशंकर प्रसाद का नाम जोड़ दिया था।
रविशंकर प्रसाद ने इस पर सफाई देते हुए कहा कि उन्होंने कभी ऐसी बात नहीं कही। उन्होंने स्पष्ट किया कि असल में वे ये कह रहे थे कि लोग ऐसा आरोप बीजेपी पर लगा रहे हैं, जो पूरी तरह गलत और बेबुनियाद है। वहीं, केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने भी तीखे तेवर अपनाते हुए प्रशांत किशोर को चुनौती दी। उन्होंने कहा, प्रशांत जी, हिम्मत है तो दिखाओ वो क्लिपिंग जिसमें किसी नेता ने ऐसी बात कही हो। आपने सिर्फ झूठ का नैरेटिव गढ़कर चुनाव जीता है।
परिणाम आने के बाद जब पत्रकारों ने प्रशांत किशोर से सीधा सवाल किया कि आखिर वह बीजेपी नेता कौन था जिसने कुत्ता-बिल्ली वाली बात कही थी और क्या उनके पास कोई साक्ष्य है? तो प्रशांत किशोर ने कोई जवाब नहीं दिया। वे इस सवाल को बस मुस्कुराकर टाल गए।
राजनीतिक विश्लेषक मान रहे हैं कि प्रशांत किशोर ने बहुत ही बारीकी से एक ऐसा नैरेटिव सेट किया जिससे बीजेपी का अपना ही बयान बनकर नुकसान हुआ। बीजेपी के बड़े नेता इसे अहंकार और झूठ का मिश्रण बता रहे हैं। फिलहाल, चुनाव जीत लेने के बाद प्रशांत किशोर के पास न तो उस बयान का कोई प्रमाण है और न ही उस पर वे अब कोई सफाई देना चाहते हैं। इस पूरे प्रकरण ने साबित कर दिया है कि आधुनिक चुनावी राजनीति में एक झूठा नैरेटिव भी परिणाम बदलने की ताकत रखता है।
*भाजपा कार्यकर्ताओं के सम्मान और समर्पण से चलने वाली पार्टी है। दुर्भाग्य से विपक्ष द्वारा लगातार भ्रांतियां फैलाई जा रही हैं। आज मैं आपके साथ तथ्य साझा करना चाहता हूं। जीत-हार लोकतंत्र का हिस्सा है, पर झूठ फैलाकर कार्यकर्ताओं का मनोबल तोड़ना बहुत गलत है। सोशल मीडिया और कुछ मीडिया… pic.twitter.com/YP0OOhPAOk
— Ravi Shankar Prasad (@rsprasad) August 4, 2026
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