महाराष्ट्र के शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक विकास की आधारशिला रखने वाले प्रख्यात शिक्षाविद और समाजसेवी पद्मश्री डॉ. डी. वाय. पाटिल का निधन हो गया है। उनके निधन से पूरे देश में शोक की लहर है। उन्होंने अपने दूरदर्शी नेतृत्व से उच्च शिक्षा, चिकित्सा और खेल इंफ्रास्ट्रक्चर को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया।
शिक्षा के क्षेत्र में अमिट छाप डॉ. पाटिल ने शिक्षा को केवल डिग्री का माध्यम नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण का आधार माना। उन्होंने इंजीनियरिंग, चिकित्सा, प्रबंधन और आर्किटेक्चर जैसे विविध क्षेत्रों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित की। आज उनके नाम पर 16 से अधिक संकायों में 146 से ज्यादा पाठ्यक्रम संचालित हो रहे हैं।
सात विश्वविद्यालयों की स्थापना का रिकॉर्ड भारतीय उच्च शिक्षा के इतिहास में डॉ. पाटिल का योगदान अद्वितीय है। उन्होंने देश भर में सात स्वतंत्र विश्वविद्यालयों की स्थापना की, जो आज लाखों छात्रों को आधुनिक और शोध-आधारित शिक्षा प्रदान कर रहे हैं। यह उपलब्धि उनकी संस्थागत दूरदर्शिता का प्रमाण है।
स्वास्थ्य और खेल में विश्वस्तरीय योगदान शिक्षा के साथ-साथ डॉ. पाटिल ने स्वास्थ्य क्षेत्र में भी कीर्तिमान स्थापित किए। कोल्हापुर से लेकर नवी मुंबई तक फैले उनके अस्पतालों ने लाखों मरीजों को सस्ता और बेहतर इलाज मुहैया कराया। वहीं, खेल जगत में उन्होंने नवी मुंबई में अत्याधुनिक डी. वाय. पाटिल स्टेडियम का निर्माण किया, जिसने आज विश्वस्तरीय आयोजनों के लिए देश को गौरवान्वित किया है।
एक कुशल प्रशासक और राजनेता डॉ. डी. वाय. पाटिल ने केवल एक शिक्षाविद के रूप में ही नहीं, बल्कि बिहार, त्रिपुरा और पश्चिम बंगाल के राज्यपाल के रूप में भी देश की सेवा की। संवैधानिक पदों पर रहते हुए उन्होंने सादगी और जनसरोकार की एक नई परंपरा स्थापित की, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए एक मिसाल है।
एक युग का अंत, प्रेरणा का स्रोत राजनीतिक और सामाजिक जगत की अनेक हस्तियों ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की है। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस सहित कई नेताओं ने उन्हें शिक्षा महर्षि बताते हुए कहा कि उन्होंने न केवल संस्थान बनाए, बल्कि एकेडमिक एक्सीलेंस को एक नई परिभाषा दी।
डॉ. पाटिल का जीवन और उनका कार्य हमेशा आने वाली पीढ़ियों को समाज के प्रति समर्पित रहने और बड़े सपने देखने के लिए प्रेरित करता रहेगा।
डी. वाय. पाटील ग्रुपचे संस्थापक, त्रिपुरा, बिहार आणि पश्चिम बंगालचे माजी राज्यपाल पद्मश्री डॉ. डी. वाय. पाटील यांच्या निधनाचे वृत्त अत्यंत दुःखद आहे.
— Devendra Fadnavis (@Dev_Fadnavis) August 4, 2026
सर्वसामान्य कार्यकर्त्यापासून सुरू झालेला त्यांचा प्रवास महापौर, लोकप्रतिनिधी आणि पुढे विविध राज्यांचे राज्यपाल अशा महत्त्वाच्या… pic.twitter.com/AnhMADLXmF
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