लेह-लद्दाख: दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों के हक में आवाज उठाने के बाद सोशल एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक अब अपने गांव लेह लौट गए हैं। घर वापसी के दौरान उन्होंने वंदे भारत एक्सप्रेस में सफर किया और भारतीय रेलवे की जमकर तारीफ की।
इस तारीफ के बाद वांगचुक को सोशल मीडिया पर कुछ लोगों की आलोचनाओं का सामना करना पड़ा। उन पर सरकार के समर्थन का आरोप लगाया गया। अब वांगचुक ने इन आरोपों पर चुप्पी तोड़ते हुए बेहद तीखा जवाब दिया है।
सही को सही कहने में कैसा संकोच? वांगचुक ने एक वीडियो संदेश जारी कर स्पष्ट किया कि किसी अच्छे काम की सराहना को राजनीति के चश्मे से नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा, अगर देश में कुछ अच्छा हो रहा है, तो उसकी तारीफ होनी चाहिए। चाहे वह किसी भी पक्ष से संबंधित क्यों न हो।
उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि अगर इसरो मंगल ग्रह पर इंसान भेज दे, तो क्या हम उसकी तारीफ नहीं करेंगे? उन्होंने कहा कि हमें किसी विचारधारा का अंधभक्त बनने के बजाय हर मुद्दे को निष्पक्ष होकर देखने की आदत डालनी चाहिए।
इंजीनियरिंग के कायल हुए वांगचुक कश्मीर से लौटते हुए वंदे भारत में सफर करने वाले वांगचुक ने भारतीय रेलवे के आधुनिकीकरण की सराहना की। उन्होंने चिनाब ब्रिज को इंजीनियरिंग का एक शानदार नमूना करार दिया। उन्होंने कहा कि कश्मीर तक रेल नेटवर्क का पहुंचना एक बड़ी उपलब्धि है, जिसे स्वीकार करने में कोई बुराई नहीं है।
सरकार से किए वादों पर कायम तारीफों के बीच वांगचुक ने सरकार के सामने अपनी मांगें फिर से दोहराई हैं। उन्होंने कहा कि भले ही वह घर लौट आए हैं, लेकिन वे उन मुद्दों को नहीं भूले हैं जिनके लिए उन्होंने जंतर-मंतर पर आवाज उठाई थी।
उन्होंने केंद्र सरकार को याद दिलाया कि अनशन खत्म कराने के दौरान जो लिखित आश्वासन दिए गए थे, उन्हें पूरा किया जाए। साथ ही, उन्होंने नीट पेपर लीक मामले में प्रभावित छात्रों के परिवारों को मुआवजा देने की मांग भी उठाई।
छात्रों के भविष्य की चिंता वांगचुक ने जोर देकर कहा कि प्रदर्शन में शामिल किसी भी छात्र के खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि देश के निर्माण में सभी की भूमिका है और समय पर किए गए वादों की अहमियत सबसे ज्यादा होती है। उन्होंने जनता से भी अपील की कि वे देशहित में सही और गलत की पहचान करने की क्षमता विकसित करें।
*Back In My Village…
— Sonam Wangchuk (@Wangchuk66) July 31, 2026
But haven’t forgotten the causes.
With hopes that government will fulfil the remaining promises too…
No copyrights share freely #cjp #sonamwangchuknews pic.twitter.com/785UObJNqA
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