जलप्रलय: असम में 80 मौतों का तांडव, 7 लाख लोग बेघर; देश के अन्य राज्यों में भी बाढ़ से हाहाकार
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असम में कुदरत का कहर जारी है। पिछले छह दशकों की सबसे भीषण बाढ़ ने राज्य को पूरी तरह से तबाह कर दिया है। चारों तरफ सिर्फ पानी ही पानी नजर आ रहा है, जिससे जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है। इस त्रासदी में अब तक 80 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 7 लाख से ज्यादा लोग अपना घर-बार छोड़कर राहत शिविरों में शरण लेने को मजबूर हैं।

असम में तबाही के आंकड़े

बाढ़ की विभीषिका का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि राज्य के 11 जिलों में करीब 7.21 लाख लोग और 900 गांव सीधे तौर पर प्रभावित हैं। चराईदेव, शिवसागर, जोरहाट और गोलाघाट जिले सबसे अधिक संकट में हैं। ब्रह्मपुत्र नदी का विस्तार सामान्य सीमा से तीन गुना बढ़कर 21 किलोमीटर चौड़ा हो गया है, जिसने अपने दायरे में आने वाली हर चीज को जलमग्न कर दिया है।

खेती और अर्थव्यवस्था को करारा झटका

बाढ़ से केवल जान-माल का ही नुकसान नहीं हुआ, बल्कि राज्य की अर्थव्यवस्था भी चरमरा गई है। लगभग 21,523 हेक्टेयर कृषि भूमि जलमग्न हो गई है। वहीं, 11,000 से अधिक मवेशी पानी के तेज बहाव में बह गए हैं। बुनियादी ढांचे की बात करें तो 13,000 घरों में पिछले 11 दिनों से बिजली आपूर्ति ठप है, जिससे जनजीवन पूरी तरह अंधकारमय हो चुका है।

राहत और बचाव कार्य

सरकार ने राहत और बचाव कार्य के लिए 216 शिविर और 1,788 राहत वितरण केंद्र स्थापित किए हैं। इन शिविरों में वर्तमान में 71,416 लोग आश्रित हैं। प्रशासन उन्हें भोजन, पेयजल और दवाइयां मुहैया कराने की कोशिश कर रहा है, लेकिन क्षेत्र की भौगोलिक चुनौतियों के कारण राहत सामग्री पहुँचाना एक बड़ी चुनौती बना हुआ है।

पूरे देश में बाढ़ का कोहराम

असम ही नहीं, देश के अन्य हिस्सों में भी बाढ़ ने कहर बरपाया है। गुजरात के वलसाड, नवसारी, खेड़ा, अमरेली और सूरत जिलों में स्थिति भयावह है, जहाँ प्रशासन ने अब तक 30 से अधिक मौतों की पुष्टि की है। इसके अलावा, ओडिशा में 2 लाख से अधिक लोग प्रभावित हुए हैं और 3 लोगों ने जान गंवाई है। वहीं, कश्मीर घाटी में बादल फटने की घटनाओं ने शोपियां जिले के कई गांवों में तबाही मचा दी है।

मौसम विभाग की चेतावनी

भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने आने वाले दिनों के लिए अलर्ट जारी किया है। 3 अगस्त तक असम के साथ-साथ अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम, त्रिपुरा और मेघालय में भारी बारिश की चेतावनी दी गई है, जिससे स्थिति और अधिक गंभीर होने की आशंका है।

हर साल 19 साल पीछे धकेलता है जलसंकट

असम का लगभग 40% हिस्सा भौगोलिक रूप से नदी घाटियों पर टिका है। राज्य को हर साल बाढ़ से औसतन 200 करोड़ रुपये का नुकसान उठाना पड़ता है। विशेषज्ञों का मानना है कि हर साल बाढ़ के कारण बुनियादी ढांचे के नष्ट होने से असम विकास की दौड़ में करीब 19 साल पीछे चला जाता है। ब्रह्मपुत्र और बराक नदी की घाटियों में बसा यह राज्य मानसून आते ही हर साल इसी तरह के विनाश का गवाह बनता है।

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