नेपाल की हिंदू पहचान की जंग: मुस्लिम मोहल्लों से हटाए गए इस्लामी झंडे, बदले सुर
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नेपाल में हाल के दिनों में सांप्रदायिक तनाव तेजी से बढ़ा है। मुस्लिम बहुल इलाकों में कांवड़ यात्रा पर हुए हमले के बाद स्थिति काफी गंभीर हो गई है। अब नेपाल के हिंदू समाज ने अपनी पहचान बचाने के लिए मोर्चा खोल दिया है।

घरों से हटाए गए इस्लामी झंडे सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे कई वीडियो में देखा जा सकता है कि नेपाल के हिंदू लोग मुस्लिम मोहल्लों में पहुंच रहे हैं। वहां घरों और सार्वजनिक स्थानों पर लगे इस्लामी झंडों को हटाया जा रहा है। प्रदर्शनकारियों का साफ कहना है कि यदि नेपाल में रहना है, तो यहां की संस्कृति और संविधान का सम्मान करना होगा।

नेपाली झंडा लगाओ की मांग हिंदू प्रदर्शनकारियों का तर्क है कि वे अपने देश का इस्लामीकरण नहीं होने देंगे। इन वीडियो में लोग मुस्लिम निवासियों से अपील करते हुए दिख रहे हैं कि वे इस्लामी झंडे हटाकर नेपाल का राष्ट्रीय ध्वज लगाएं। इस घटना के बाद नेपाल के मुस्लिम समुदाय के बयानों में भी नरमी देखी जा रही है, जो अब शांति और सद्भाव की बात कर रहे हैं।

तरई में डेमोग्राफिक बदलाव की चिंता वरिष्ठ पत्रकार अनिल गिरी ने इस स्थिति पर गंभीर चिंता जताई है। उन्होंने भारत की उस पुरानी चेतावनी को याद दिलाया, जिसमें भारतीय अधिकारियों ने नेपाल के तरई इलाकों में हो रहे डेमोग्राफिक (जनसांख्यिकीय) बदलाव और बढ़ती अस्थिरता के प्रति आगाह किया था। विशेषज्ञों का मानना है कि यह तो अभी शुरुआत है, पूरी तस्वीर और भी भयावह हो सकती है।

सरकार की अनदेखी और बढ़ता खतरा करीब 3 साल पहले नेपाल की आर्म्ड पुलिस फोर्स (APF) ने सरकार को एक गोपनीय रिपोर्ट सौंपी थी। इसमें चेतावनी दी गई थी कि तराई-मधेश इलाकों में कुछ कट्टरपंथी तत्व सक्रिय हैं, जो जातीय और सांप्रदायिक झगड़ों के जरिए समाज को बांटना चाहते हैं। हालांकि, उस समय की तत्कालीन सरकार ने इस रिपोर्ट को नजरअंदाज कर दिया, जिसका खामियाजा अब नेपाल भुगत रहा है।

हिंदू समाज का आक्रोश नेपाल में हिंदू समाज का यह प्रदर्शन अपनी धार्मिक पहचान और संस्कृति को सुरक्षित रखने का एक प्रयास माना जा रहा है। क्या नेपाल सरकार इस संवेदनशीलता को समझकर समय रहते कदम उठाएगी, या यह चिंगारी देश की शांति और एकता के लिए बड़ा खतरा बन जाएगी? यह आने वाला समय बताएगा।

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