लोकतंत्र को कमजोर करने की इजाजत नहीं: पटना SSP के खिलाफ प्रशांत किशोर का मोर्चा
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पटना की बांकीपुर विधानसभा सीट पर उपचुनाव की मतगणना से ठीक पहले राजनीतिक पारा सातवें आसमान पर है। जन सुराज पार्टी के मुखिया प्रशांत किशोर ने सीधे तौर पर पटना के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) को निशाने पर लेते हुए प्रशासन पर पक्षपात के गंभीर आरोप लगाए हैं।

सबूतों के साथ SSP की शिकायत प्रशांत किशोर ने ऐलान किया है कि उनकी पार्टी ने पटना SSP के खिलाफ औपचारिक शिकायत दर्ज कराई है। किशोर का आरोप है कि पिछले तीन दिनों में पुलिस-प्रशासन ने एक विशेष राजनीतिक दल को फायदा पहुँचाने के लिए अपनी हदों को पार किया है। उन्होंने दावा किया कि पुलिस ने न केवल वोटरों को डराया-धमकाया, बल्कि उनके नेताओं को बिना किसी ठोस कारण के हिरासत में भी लिया।

चुनाव आयोग को दी चेतावनी प्रशांत किशोर ने पटना में मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) से मुलाकात कर लिखित सबूत सौंपे हैं। चुनाव अधिकारियों ने उन्हें निष्पक्ष जांच और कार्रवाई का आश्वासन दिया है। हालांकि, पीके ने स्पष्ट कर दिया है कि अगर प्रशासन स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो वे दिल्ली स्थित चुनाव आयोग का दरवाजा खटखटाएंगे और जरूरत पड़ने पर अदालत (कोर्ट) का रुख भी करेंगे।

पुलिस-गुंडा गठजोड़ का आरोप पीके ने कड़े शब्दों में कहा, किसी भी हाल में SSP या किसी अन्य अधिकारी को बिहार में लोकतंत्र को कमजोर करने की इजाजत नहीं दी जा सकती। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस ने भाजपा के साथ मिलकर चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित करने की साजिश रची। उन्होंने पटना और बख्तियारपुर में पुलिस और आपराधिक तत्वों की मिलीभगत से गुंडागर्दी करने का भी गंभीर आरोप लगाया।

बिना FIR नेताओं को हिरासत में रखने का आरोप विवाद की जड़ जन सुराज के नेताओं की कथित गैर-कानूनी हिरासत है। किशोर के अनुसार, बुधवार रात पार्टी के 16 से अधिक नेताओं को पुलिस थानों में बंधक बनाकर रखा गया। सबसे हैरान करने वाली बात यह रही कि कागजों पर कोई औपचारिक गिरफ्तारी नहीं दिखाई गई, जिससे प्रशासनिक प्रक्रिया पर बड़े सवाल खड़े हो गए हैं।

अगले 48 घंटे निर्णायक बता दें कि बांकीपुर उपचुनाव के लिए 30 जुलाई को मतदान संपन्न हुआ था और 3 अगस्त को नतीजे आने हैं। भाजपा, जन सुराज और राजद के बीच इस त्रिकोणीय मुकाबले में प्रशांत किशोर के इस आक्रामक रुख ने परिणामों से पहले ही राज्य की राजनीति में हलचल मचा दी है। अब सबकी निगाहें चुनाव आयोग द्वारा की जाने वाली जांच पर टिकी हैं।

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