आइशी घोष की तलाश में CPI(M) दफ्तर पहुंची दिल्ली पुलिस, राज्यसभा में भारी हंगामा
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नई दिल्ली: जेएनयू छात्र संघ की पूर्व अध्यक्ष आइशी घोष को गिरफ्तार करने के लिए दिल्ली पुलिस की टीम का CPI(M) मुख्यालय (एकेजी भवन) में अचानक पहुंचना बड़ा राजनीतिक विवाद बन गया है। इस कार्रवाई के विरोध में बुधवार को राज्यसभा में जोरदार हंगामा हुआ, जिसके चलते सदन की कार्यवाही 40 मिनट के लिए स्थगित करनी पड़ी।

सदन में क्यों गरमाया माहौल? बुधवार को जैसे ही राज्यसभा की कार्यवाही शुरू हुई, विपक्ष ने दिल्ली पुलिस द्वारा एक राष्ट्रीय पार्टी के कार्यालय में घुसने के मुद्दे को जोर-शोर से उठाया। CPI(M) सांसद जॉन ब्रिटास ने इस घटना को लोकतंत्र पर हमला करार दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस बिना किसी वैध प्रक्रिया के मुख्यालय के भीतर दाखिल हुई।

जॉन ब्रिटास का तीखा हमला सांसद जॉन ब्रिटास ने सदन को बताया कि मंगलवार को सादे कपड़ों में पुलिस की एक टीम आइशी घोष को हिरासत में लेने पहुंची थी। उनका कहना है कि आइशी ने हाल ही में जंतर-मंतर पर हुए छात्र आंदोलन में सक्रिय हिस्सा लिया था, संभवतः इसी का बदला लेने के लिए उन्हें निशाना बनाया जा रहा है। ब्रिटास ने यह भी सवाल उठाया कि क्या फोन पर वारंट की जानकारी देकर किसी के दफ्तर में घुसा जा सकता है।

मल्लिकार्जुन खरगे और जेपी नड्डा में भिड़ंत विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने ब्रिटास का समर्थन करते हुए कहा कि देश में लोकतंत्र खतरे में है। वहीं, पलटवार करते हुए केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने कहा कि दिल्ली पुलिस कानून के दायरे में रहकर अपना काम कर रही है। नड्डा ने तंज कसते हुए कहा, इमरजेंसी के दौरान मुझे क्लास से गिरफ्तार किया गया था, तब ये लोग कहां थे?

क्या है पूरा मामला? पुलिस सूत्रों के अनुसार, आइशी घोष के खिलाफ साल 2021 के एक मामले में अदालत ने गैर-जमानती वारंट जारी किया है। बताया जा रहा है कि घोष बार-बार अदालती सुनवाई में पेश नहीं हो रही थीं, जिसके बाद कोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए वारंट जारी किया। दिल्ली पुलिस इसी वारंट की तामील कराने के लिए उनके संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही है।

नीट पेपर लीक का भी मुद्दा हंगामे के दौरान विपक्षी सांसदों ने आइशी घोष के मुद्दे के साथ-साथ नीट प्रश्नपत्र लीक के खिलाफ प्रदर्शन करने वाले छात्रों पर पुलिसिया कार्रवाई का मामला भी उठाया। विपक्षी दल इस मुद्दे पर गृह मंत्री अमित शाह से बयान की मांग कर रहे हैं। फिलहाल, सदन के अंदर पक्ष-विपक्ष की बहस जारी है और मामला तूल पकड़ता जा रहा है।

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