उत्तर प्रदेश के आगामी विधानसभा चुनाव में दलित वोट बैंक को लेकर घमासान तेज हो गया है। समाजवादी पार्टी और बसपा की घेराबंदी को तोड़ने के लिए बीजेपी ने अब संत रविदास महाराज की 650वीं जयंती को अपना मुख्य अस्त्र बनाया है।
नितिन नवीन ने संभाली कमान बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने दलितों को पार्टी से जोड़े रखने के लिए मोर्चा संभाल लिया है। वाराणसी में आज वह संत रविदास मंदिर में दर्शन करेंगे और इसके बाद बड़े पैमाने पर संकल्प अभियान का आगाज करेंगे। पार्टी का मानना है कि संत रविदास का आशीर्वाद 2027 में दलित समाज को बीजेपी की ओर मोड़ने में अहम भूमिका निभाएगा।
सात महीने का मेगा प्लान बीजेपी ने 29 जुलाई से शुरू होकर कई महीनों तक चलने वाला एक विस्तृत कार्यक्रम तैयार किया है। इसमें माटी पूजन से लेकर 131 कलशों में पवित्र मिट्टी एकत्र करना शामिल है। इन कलशों को उत्तर प्रदेश और अन्य राज्यों के दलित बाहुल्य क्षेत्रों में भेजा जाएगा। अंत में, अक्टूबर-नवंबर में जालंधर से वाराणसी तक समरसता यात्रा निकाली जाएगी, जो सीधा दलित मतदाताओं के बीच पैठ बनाने की कोशिश है।
पंजाब और यूपी पर नजर राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस आयोजन का मकसद केवल यूपी ही नहीं, बल्कि पंजाब भी है। बीजेपी पंजाब में पहली बार अकेले दम पर चुनाव लड़ने जा रही है, जहां रविदासिया समाज की आबादी एक बड़ा चुनावी फैक्टर है। इस आयोजन के जरिए पार्टी दोनों राज्यों में अपने आधार को मजबूत करना चाहती है।
सपा और गठबंधन की चुनौती 2024 के लोकसभा चुनाव में अखिलेश यादव के PDA (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) फॉर्मूले ने बीजेपी को तगड़ा झटका दिया था। अयोध्या और मेरठ जैसी सीटों पर दलित वोटों के ध्रुवीकरण ने बीजेपी के 400 पार के दावे को कमजोर कर दिया था। अब अखिलेश यादव इसी रणनीति को 2027 में भी दोहराने की तैयारी में हैं और सामान्य सीटों पर भी दलित उम्मीदवारों को उतारने की योजना बना रहे हैं।
मायावती और छोटे दलों की सक्रियता मायावती के लिए अपना आधार बचाना अस्तित्व की लड़ाई बन चुका है। वह आकाश आनंद के जरिए खोया हुआ जनाधार वापस पाने की कोशिश कर रही हैं। वहीं, नगीना सांसद चंद्रशेखर आजाद की आजाद समाज पार्टी और चिराग पासवान (लोजपा) जैसे नेता भी दलित वोटों में अपनी हिस्सेदारी खोजने में जुट गए हैं।
कुल मिलाकर, 2027 के चुनाव में दलित वोट बैंक पर पकड़ बनाना सत्ता का रास्ता तय करेगा। बीजेपी का धार्मिक समागम अभियान क्या अखिलेश के PDA फॉर्मूले और मायावती की पुरानी विरासत के सामने टिक पाएगा? यह आने वाला समय ही बताएगा।
*संत रविदास ने समाज को समावेशी बनाते हुए समाज के उत्थान के लिए काम किया: राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री @NitinNabin pic.twitter.com/O6FCFCRaKw
— BJP Uttar Pradesh (@BJP4UP) July 29, 2026
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