आइशी घोष की गिरफ्तारी पर संसद में घमासान: आखिर कौन हैं यह चर्चित वामपंथी नेता?
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राज्यसभा में बुधवार को भारी हंगामे के बीच सदन की कार्यवाही 40 मिनट के लिए स्थगित करनी पड़ी। विवाद का केंद्र बनीं एसएफआई (SFI) नेता और जेएनयू छात्रसंघ की पूर्व अध्यक्ष आइशी घोष। आरोप है कि दिल्ली पुलिस ने सीपीआई (एम) के मुख्यालय एकेजी भवन में घुसकर उन्हें गिरफ्तार करने की कोशिश की, जिससे विपक्ष भड़क गया।

सदन में क्यों मचा हंगामा? सीपीआई (एम) सांसद जॉन ब्रिटास ने इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाया। विपक्ष ने आरोप लगाया कि पुलिस ने राजनीतिक प्रतिशोध के तहत पार्टी कार्यालय में दबिश दी। नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे समेत तमाम विपक्षी सांसदों ने इस पर गृह मंत्री अमित शाह से जवाब की मांग की। भारी नारेबाजी और गतिरोध के कारण सभापति को कार्यवाही रोकनी पड़ी।

कौन हैं आइशी घोष? आइशी घोष वामपंथी राजनीति का एक प्रमुख युवा चेहरा हैं। 2019 में जेएनयू छात्रसंघ अध्यक्ष चुनी गईं आइशी ने फीस बढ़ोतरी जैसे मुद्दों पर बड़े आंदोलनों का नेतृत्व किया। जनवरी 2020 में जेएनयू हिंसा के दौरान सिर पर गंभीर चोट लगने के बाद वह राष्ट्रीय सुर्खियों में आईं, जब उनकी खून से लथपथ तस्वीर वायरल हुई थी। सक्रिय राजनीति में कदम रखते हुए उन्होंने 2021 में पश्चिम बंगाल का विधानसभा चुनाव भी लड़ा था।

पुलिस ने क्या दी दलील? दिल्ली पुलिस का कहना है कि यह कार्रवाई पूरी तरह कानूनी है। डीसीपी सचिन शर्मा के अनुसार, 2021 के एक पुराने मामले में आइशी घोष के खिलाफ स्थानीय अदालत ने गैर-जमानती वारंट जारी किया है। पुलिस का दावा है कि अदालत में पेश न होने के कारण यह वारंट जारी हुआ है और वे केवल अदालती आदेश का पालन कर रहे हैं।

विपक्ष के क्या हैं सवाल? विपक्ष का आरोप है कि पुलिस ने इस मामले में उचित प्रक्रिया का पालन नहीं किया। जॉन ब्रिटास ने सवाल उठाया कि गिरफ्तारी के लिए वारंट की जानकारी फोन पर क्यों दी गई, जबकि यह आधिकारिक रूप से दी जानी चाहिए थी। एसएफआई का दावा है कि हालिया जंतर-मंतर आंदोलन में आइशी की सक्रिय भूमिका से बौखलाई सरकार उन्हें निशाना बना रही है।

फिलहाल, इस मामले की अगली सुनवाई 30 जुलाई को होनी है। संसद से सड़क तक जारी इस विवाद ने सरकार बनाम विपक्ष की तनातनी को एक बार फिर चरम पर पहुंचा दिया है।

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