नोटों की कांवड़: हरिद्वार से दिल्ली तक चर्चा में है भक्तों की यह अनोखी आस्था
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कांवड़ यात्रा 2026 अपनी पूरी भव्यता के साथ शुरू हो चुकी है। लाखों श्रद्धालु गंगा जल लेकर शिव भक्ति में सराबोर हैं, लेकिन इस बार हरिद्वार की सड़कों पर एक ऐसी कांवड़ नजर आई जिसने सबका ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। यह कांवड़ फूलों या लाइटों से नहीं, बल्कि भारतीय करेंसी नोटों से सजी हुई है।

किसने और क्यों तैयार की यह कांवड़? दिल्ली के हर्ष विहार से आए श्रद्धालु विनोद कुमार और उनके साथियों ने इस अनूठी कांवड़ को तैयार किया है। विनोद का कहना है कि वे हर साल कांवड़ यात्रा पर कुछ नया करने की कोशिश करते हैं। इस बार उन्होंने मंदिर के लिए दान की जाने वाली राशि को सीधे देने के बजाय, पहले भगवान शिव के प्रति अपनी भक्ति को एक रचनात्मक रूप देने का निर्णय लिया।

24 घंटे की मेहनत और नोटों का अंबार इस कांवड़ को तैयार करने में 9 लोगों की टीम ने लगातार 24 घंटे काम किया। इसमें 10, 20, 50 और 100 रुपये के नोटों का उपयोग किया गया है। यात्रा पूरी होने के बाद, इन नोटों को मंदिर में दान कर दिया जाएगा। भक्तों के अनुसार, यह नोटों का कोई प्रदर्शन नहीं, बल्कि ईश्वर के प्रति उनके समर्पण का एक नया तरीका है।

रोजाना 18 किमी का सफर, 10 अगस्त तक वापसी विनोद और उनकी टीम ने अपनी यात्रा के लिए सख्त नियम बनाए हैं। वे रोजाना औसतन 17 से 18 किलोमीटर की पैदल दूरी तय कर रहे हैं। योजना के अनुसार, यह टीम 10 अगस्त तक दिल्ली के हर्ष विहार पहुंच जाएगी। इस दौरान वे पूरी तरह से शिव की भक्ति में लीन हैं और हरिद्वार से दिल्ली तक का यह सफर तय कर रहे हैं।

सुरक्षा और प्रशासन की तैयारी कांवड़ियों की भारी भीड़ को देखते हुए दिल्ली-हरिद्वार हाईवे पर प्रशासन ने कड़े इंतजाम किए हैं। 4 अगस्त से 12 अगस्त तक हाईवे पर भारी वाहनों की आवाजाही पर प्रतिबंध रहेगा ताकि श्रद्धालुओं को किसी तरह की असुविधा न हो। प्रशासन का पूरा जोर कांवड़ियों की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित करने पर है।

भक्ति में रचनात्मकता का नया दौर हरिद्वार की कांवड़ यात्रा के दौरान अक्सर अनोखी थीम पर आधारित कांवड़ देखने को मिलती रही हैं। कोई इसे फूलों से सजाता है, तो कोई आधुनिक लाइटों का इस्तेमाल करता है। नोटों वाली यह कांवड़ उसी रचनात्मक परंपरा की एक कड़ी है। हालांकि, यह चर्चा का विषय बन गई है, लेकिन भक्तों का स्पष्ट मानना है कि उनका लक्ष्य सिर्फ और सिर्फ भगवान शिव की सेवा और मंदिर में दान करना है।

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