कल पासपोर्ट लेकर जाना होगा बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा : पाकिस्तान की संसद में गूंजी देश टूटने की चेतावनी
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पाकिस्तान इस समय अपने सबसे बुरे दौर से गुजर रहा है। देश की संसद के भीतर से ही अस्तित्व को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। सांसद मौलाना अता-उर-रहमान ने सीधे तौर पर चेतावनी दी है कि यदि हालात नहीं सुधरे, तो पाकिस्तान का नक्शा बदल सकता है।

संसद में गूंजी विभाजन की आहट मौलाना फजलुर रहमान के भाई और सांसद मौलाना अता-उर-रहमान ने सदन में सरकार और सेना को आईना दिखाया। उन्होंने कहा, खुदा के लिए बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा के लोगों पर रहम करें। मुल्क टूटने की कगार पर है। अगर यही स्थिति बनी रही, तो कल हमें इन प्रांतों में जाने के लिए पासपोर्ट की जरूरत होगी। उनकी इस टिप्पणी ने पाकिस्तानी सत्ता के गलियारों में खलबली मचा दी है।

बलोचिस्तान गणराज्य का ऐलान इस बीच, बलोच नेता मीर यार बलोच ने तीखा तंज कसते हुए दावा किया है कि बलोचिस्तान गणराज्य अब एक स्वतंत्र देश बन चुका है। उन्होंने सोशल मीडिया पर कहा कि बलोचिस्तान दुनिया का 194वां देश बन गया है और जल्द ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसे मान्यता मिलने लगेगी। उन्होंने पाकिस्तानी सेना को अपनी नींद से जागने की कड़ी नसीहत भी दी।

हिंसा और गृहयुद्ध जैसे हालात बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा में इस वक्त अघोषित गृहयुद्ध जैसी स्थिति है। सेना प्रमुख असीम मुनीर ने हिंसा खत्म करने के दावे किए हैं, लेकिन जमीनी हकीकत इसके उलट है। हाल के दिनों में इन इलाकों में दर्जनों पाकिस्तानी सैनिक मारे गए हैं, जिससे सेना का मनोबल गिरा है और स्थानीय लोगों का गुस्सा चरम पर है।

चौतरफा घिरा इस्लामाबाद पाकिस्तान की मुसीबतें केवल इन दो प्रांतों तक सीमित नहीं हैं। एक तरफ खैबर पख्तूनख्वा में पश्तून तहफ़्फ़ुज़ मूवमेंट (PTM) सेना के खिलाफ सड़कों पर है, तो दूसरी तरफ पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (PoJK) में भी विरोध की आग दहक रही है। भीषण महंगाई, नागरिक अधिकारों का हनन और सेना की बर्बरता ने जनता को बागी बना दिया है।

बदलती नीतियां ही एकमात्र रास्ता विशेषज्ञों का मानना है कि सेना का अत्यधिक हस्तक्षेप और आर्थिक बदहाली ने पाकिस्तान के प्रांतों में अलगाव की भावना को गहरा कर दिया है। मौलाना अता-उर-रहमान का बयान इसी जमीनी हकीकत का संकेत है। यदि इस्लामाबाद ने दमनकारी नीतियां नहीं बदलीं, तो पाकिस्तान को 1971 जैसे एक और विभाजन का दंश झेलना पड़ सकता है।

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