प्रतियोगी परीक्षाओं की विसंगतियों और पेपर लीक के खिलाफ शुरू हुआ छात्र आंदोलन एक बार फिर उग्र रूप ले सकता है। केंद्र सरकार और आंदोलनकारी छात्रों के बीच हुए समझौते के 3 दिन भी नहीं बीते कि सरकार के रुख को लेकर सवाल खड़े होने लगे हैं।
वायदा खिलाफी और बिहार में बढ़ता दबाव केंद्र सरकार ने छात्रों से तीन मुख्य वायदे किए थे—शिक्षा मंत्री का इस्तीफा, आंदोलनकारियों पर दर्ज मुकदमे वापस लेना और प्रभावित परिवारों को मुआवजा। लेकिन अब खबरें आ रही हैं कि सरकार अपने इन वादों से पीछे हट रही है। बिहार में लगभग 700 छात्रों पर दर्ज मुकदमे अभी भी वापस नहीं लिए गए हैं, जिसके विरोध में आइसा नेता नेहा बोरा ने सड़कों पर उतरने का ऐलान कर दिया है।
सरकार की साख पर उठ रहे सवाल राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि सरकार ने इन छात्रों के खिलाफ कार्रवाई जारी रखी या मुकदमों को वापस नहीं लिया, तो यह केंद्र और राज्य दोनों सरकारों के लिए बड़ी राजनीतिक मुसीबत बन जाएगा। यह न केवल केंद्र की विश्वसनीयता पर सवाल उठाएगा, बल्कि युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ के रूप में भी देखा जाएगा।
मुंहजुबानी आश्वासनों का खतरा योगेंद्र यादव जैसे विश्लेषकों ने पहले ही आगाह किया था कि सरकार के मुंहजुबानी आश्वासनों पर भरोसा करना जोखिम भरा हो सकता है। समझौते का कोई लिखित स्वरूप सामने न आना सरकार की नियत पर संदेह पैदा करता है। यदि अगले कुछ दिनों में सरकार ने कोई ठोस सकारात्मक कदम नहीं उठाया, तो छात्रों का व्यवस्था से पूरी तरह भरोसा उठ जाएगा।
दोबारा भड़क सकता है आक्रोश शिक्षा मंत्री के इस्तीफे के बाद भी यदि सरकार दमनकारी नीति अपनाती है, तो छात्र एक बार फिर उग्र होकर सड़कों पर आ सकते हैं। इस बार उनका आक्रोश पहले से कहीं अधिक तीव्र हो सकता है, जिसे संभालना प्रशासन के लिए आसान नहीं होगा। बिना नाम-पट्टिका वाली पुलिस, कील वाले डंडे और पैलेट गन का इस्तेमाल जैसे पुराने जख्म अभी भी ताजा हैं।
विपक्ष का हमला और सरकार की चुनौती सरकार की यह वायदा खिलाफी विपक्ष के लिए एक बड़ा मुद्दा बन रही है। अगर सरकार अपनी नाक ऊंची रखने की जिद में छात्रों के दमन पर उतरती है, तो उसे भविष्य में कठिन सवालों का सामना करना पड़ेगा। सरकार के पास अब यही रास्ता है कि वह किए गए समझौते को पूरी ईमानदारी से लागू करे, अन्यथा यह हार उसके लिए दूरगामी परिणामों वाली साबित हो सकती है।
#WATCH | Delhi: After talks with the government, Cockroach Janta Party s National Spokesperson Ashutosh Ranka says, We held three rounds of discussions with the government delegation. Our protest at Jantar Mantar, which was going on for several days, had three main demands:… pic.twitter.com/erlp8eXgBz
— ANI (@ANI) July 25, 2026
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