बांकीपुर उपचुनाव: नीतीश के वीडियो पर मचा घमासान, क्या पीके का माइंड गेम बिगाड़ेगा बीजेपी का खेल?
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पटना की हाई-प्रोफाइल बांकीपुर विधानसभा सीट पर उपचुनाव का प्रचार थम चुका है। 30 जुलाई को होने वाली वोटिंग से ठीक पहले एक वायरल वीडियो ने बिहार की राजनीति में भूचाल ला दिया है। सियासी गलियारों में अब बस एक ही चर्चा है—क्या यह एनडीए की जीत की नींव है या प्रशांत किशोर की सोची-समझी चाल?

क्या है डीपफेक विवाद? विवाद की जड़ एनडीए द्वारा जारी 58 सेकंड का एक वीडियो है, जिसमें पूर्व सीएम नीतीश कुमार एनडीए प्रत्याशी नीरज कुमार सिन्हा के लिए वोट मांगते दिख रहे हैं। जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर (PK) ने इसे AI से बना डीपफेक करार दिया है। पीके ने चुनौती दी है कि अगर बीजेपी यह साबित कर दे कि वीडियो असली है, तो वे अपनी उम्मीदवारी वापस ले लेंगे।

जेडीयू और बीजेपी का पलटवार एनडीए ने पीके के आरोपों को हार की बौखलाहट करार दिया है। जेडीयू प्रवक्ता नीरज कुमार ने कहा कि पीके झूठ का नैरेटिव गढ़ रहे हैं। एनडीए ने इस मामले में पुलिस में शिकायत दर्ज कराते हुए कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी है। बीजेपी का साफ कहना है कि पीके अपनी हार को भांप चुके हैं।

बीजेपी का अभेद्य किला और चुनौतियां बांकीपुर पारंपरिक रूप से बीजेपी का गढ़ रहा है। नितिन नवीन की पांच बार की जीत और उनके पिता का इतिहास यहां की जमीनी हकीकत है। शहरी पटना का कायस्थ, वैश्य और उच्च वर्ग का झुकाव अक्सर बीजेपी की ओर ही रहता है। हालांकि, पीके ने जलजमाव और कागजी विकास के मुद्दों को उछालकर शहरी मध्यम वर्ग के बीच अपनी पैठ बनाने की कोशिश की है।

अंतिम समय का माइंड गेम राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि एनडीए यह संदेश देने में सफल रहा कि पीके ने बीमार नीतीश कुमार का अनादर किया है, तो महिला और अति पिछड़ा वर्ग के वोटर बीजेपी के पक्ष में और मजबूती से गोलबंद हो सकते हैं। वहीं, प्रशांत किशोर के इस दांव ने एनडीए के निचले स्तर के समर्थकों में असमंजस भी पैदा किया है।

किसके हाथ लगेगी बाजी? बांकीपुर का मुकाबला अब केवल चुनाव नहीं, बल्कि एक प्रतिष्ठा की लड़ाई बन गया है। बीजेपी जहां अपने गढ़ को बचाने के लिए पूरी ताकत झोंक चुकी है, वहीं आरजेडी भी अपने पारंपरिक मुस्लिम-यादव समीकरणों के जरिए मैदान में है। प्रशांत किशोर के लिए यह उपचुनाव उनकी जन सुराज पार्टी के अस्तित्व की पहली बड़ी परीक्षा है।

30 जुलाई को बांकीपुर की जनता ईवीएम में अपना फैसला कैद करेगी, लेकिन इस डीपफेक वॉर ने यह स्पष्ट कर दिया है कि बिहार की राजनीति में अब तकनीक और नैरेटिव का घालमेल नजीतों को बदलने की क्षमता रखता है। फैसला 3 अगस्त को सबके सामने होगा।

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