Backops Limited: 17 साल पहले दफन हुई कंपनी ने फिर बढ़ाई सियासी हलचल, जानिए क्या है पूरा विवाद
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भारतीय राजनीति में कई बार ऐसे मुद्दे सामने आते हैं जो वर्षों पुरानी धूल झाड़कर सत्ता के गलियारों में हड़कंप मचा देते हैं। इस बार चर्चा में है लंदन का 2 Frognal Way पता और Backops Limited नाम की एक ऐसी कंपनी, जो आधिकारिक तौर पर 17 साल पहले ही बंद हो चुकी है।

भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने संसद के मानसून सत्र के दौरान इस कंपनी को लेकर एक बड़ा सवाल खड़ा किया है। दुबे का आरोप है कि भारत के एक प्रमुख विपक्षी नेता का इस विदेशी कंपनी से गहरा नाता रहा है, जिसे चुनाव हलफनामों में सही ढंग से स्पष्ट नहीं किया गया।

क्या है Backops Limited का कनेक्शन ?

Backops Limited की शुरुआत 2003 में यूनाइटेड किंगडम में हुई थी। दस्तावेजों के अनुसार, इस कंपनी के शुरुआती डायरेक्टर राहुल गांधी और उनके बिजनेस पार्टनर उल्रिक मैकनाइट (Ulrik McKnight) थे। 2005 तक राहुल गांधी की इस कंपनी में 65% हिस्सेदारी थी। फरवरी 2009 में यह कंपनी आधिकारिक तौर पर बंद कर दी गई थी।

निशिकांत दुबे के गंभीर आरोप

सांसद निशिकांत दुबे का दावा है कि जिस पते (2 Frognal Way, London) पर यह कंपनी रजिस्टर्ड थी, वहां से करीब 60 अन्य कंपनियां भी संचालित होती हैं। उन्होंने ब्रायन लवग्रोव और उल्रिक मैकनाइट के कंपनी नेटवर्क पर सवाल उठाते हुए पूछा है कि क्या इन विदेशी संपर्कों का इस्तेमाल भारत विरोधी गतिविधियों या किसी गुप्त एजेंडे के लिए किया गया?

टुकड़े-टुकड़े गैंग और स्कॉर्पीन डील का साया

विवाद का एक बड़ा हिस्सा 2016 के स्कॉर्पीन पनडुब्बी लीक कांड से भी जुड़ता है। पूर्व वित्त मंत्री अरुण जेटली ने भी अतीत में आरोप लगाया था कि राहुल गांधी के पूर्व पार्टनर उल्रिक मैकनाइट उन कंपनियों से जुड़े थे, जिन्हें नेवल ग्रुप के साथ हुए रक्षा सौदों में ऑफसेट का काम मिला था। इसे बीजेपी ने कॉन्फ्लिक्ट ऑफ इंटरेस्ट (हितों का टकराव) करार दिया था।

नागरिकता और हलफनामों का पुराना जिन्न

Backops को लेकर विवाद केवल व्यापारिक नहीं रहा है। 2004 के चुनावी हलफनामे में राहुल गांधी ने इस कंपनी और एक विदेशी बैंक खाते का जिक्र किया था। साल 2015 में सुब्रमण्यम स्वामी ने दावा किया था कि यूके के कुछ दस्तावेजों में राहुल गांधी को ब्रिटिश नागरिक बताया गया था, जिसे बाद में एक टाइपिंग मिस्टेक कहकर खारिज कर दिया गया।

अंतहीन बहस, लेकिन प्रमाण का इंतजार

यह सच है कि Backops Limited एक समय राहुल गांधी के बिजनेस सफर का हिस्सा थी, लेकिन फरवरी 2009 के बाद से यह कंपनी अस्तित्व में नहीं है। निशिकांत दुबे ने इसे फिर से सुर्खियों में लाकर एक नई राजनीतिक बहस छेड़ दी है।

हालांकि, अब तक की किसी भी आधिकारिक जांच या अदालत ने इस मामले में भ्रष्टाचार या गलत काम का कोई ठोस सबूत नहीं पाया है। फिर भी, निशिकांत दुबे के ताजा खुलासों ने इस ठंडे पड़ चुके मुद्दे को फिर से जिंदा कर दिया है, जिससे संसद में आने वाले दिनों में और तीखे हंगामे के आसार हैं।

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