लोकसभा में सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 पर चर्चा शुरू हो गई है। केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने इस विधेयक को पेश करते हुए विपक्ष पर जोरदार हमला बोला और कांग्रेस शासनकाल के दौरान हुए पेपर लीक के मामलों की लंबी फेहरिस्त गिनाई।
पुराने मामलों को याद दिलाकर कांग्रेस को घेरा
मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने स्पष्ट किया कि पेपर लीक की समस्या नई नहीं है। उन्होंने कहा कि 2009 के रेलवे भर्ती परीक्षा लीक से लेकर 2012 के एम्स प्रवेश परीक्षा लीक तक, कांग्रेस के शासनकाल में बड़े पैमाने पर पेपर लीक होते रहे, लेकिन उस समय जैसी कार्रवाई होनी चाहिए थी, वह नहीं की गई। उन्होंने जोर देकर कहा कि इसीलिए अब एक फुलप्रूफ सिस्टम बनाने की जरूरत महसूस हुई।
परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता का संकल्प
डॉ. सिंह ने बताया कि 1992 और 2010 की समितियों ने भी केंद्रीय परीक्षा कमेटी के गठन का सुझाव दिया था, लेकिन पिछली सरकारों ने इसे गंभीरता से नहीं लिया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में सरकार छात्रों के भविष्य के साथ कोई समझौता नहीं करेगी। इस संशोधन बिल का एकमात्र उद्देश्य परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता और शुचिता सुनिश्चित करना है।
विपक्ष की मांग पर 10 घंटे की चर्चा
संसद में गतिरोध खत्म होने के बाद अब इस महत्वपूर्ण बिल पर लंबी चर्चा हो रही है। जहां पहले इस बिल के लिए छह घंटे का समय तय था, वहीं विपक्ष की मांग और संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू की सहमति के बाद अब लोकसभा में इस पर पूरे 10 घंटे चर्चा होगी। स्पीकर ओम बिरला ने सदन की मर्यादा और विषय की गंभीरता को देखते हुए इस चर्चा को राष्ट्रहित के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बताया है।
सदन में हंगामे के बीच कार्यवाही
चर्चा शुरू होने से पहले कांग्रेस के केसी वेणुगोपाल ने सदन में प्रधानमंत्री और गृह मंत्री की अनुपस्थिति पर सवाल उठाए। इसके अलावा, दिल्ली में छात्रों पर हुई पुलिसिया कार्रवाई को लेकर भी विपक्ष ने सरकार से जवाब मांगा। हालांकि, स्पीकर के हस्तक्षेप के बाद सदन में कामकाज शुरू हो पाया और अब सभी दल अपने रचनात्मक सुझाव रखने के लिए तैयार हैं।
इस बिल के पारित होने से उम्मीद की जा रही है कि भारत की परीक्षा प्रणाली अधिक सुरक्षित और जवाबदेह बनेगी।
#MonsoonSession2026
— SansadTV (@sansad_tv) July 28, 2026
Union Minister @DrJitendraSingh moves the Public Examinations (Prevention of Unfair Means) (Amendment) Bill, 2026 in the Lok Sabha.
The Bill seeks to amend the Public Examinations (Prevention of Unfair Means) Act, 2024, to further strengthen measures against… pic.twitter.com/0eaPB54kp8
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