असम में मानसून का तांडव: 631 गांव डूबे, 4.45 लाख लोग प्रभावित
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गुवाहाटी: देश भर में मानसून की दस्तक के साथ ही असम में कुदरत का कहर बरपा है। राज्य के छह जिले भीषण बाढ़ की चपेट में हैं, जिससे जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है। प्रशासन और आपदा प्रबंधन बल युद्ध स्तर पर बचाव कार्य में जुटे हैं।

631 गांवों में भरा पानी असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, 21 राजस्व क्षेत्रों के 631 गांव अभी भी पानी में डूबे हुए हैं। चराइदेव और शिवसागर जिले सबसे अधिक प्रभावित हैं। अकेले चराइदेव में 1.88 लाख और शिवसागर में 1.44 लाख लोग बाढ़ की विभीषिका झेल रहे हैं। राहत की बात यह है कि अब तक किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है।

कृषि और पशुधन पर भारी संकट बाढ़ ने राज्य की कमर तोड़ दी है। लगभग 37,139 हेक्टेयर फसल जलमग्न हो गई है, जिससे किसानों को भारी नुकसान हुआ है। पशुधन पर भी संकट गहराया है; करीब 2.56 लाख जानवर प्रभावित हुए हैं, जिनमें से 26,000 से अधिक बह गए हैं।

राहत शिविरों में हजारों ने ली शरण बाढ़ पीड़ितों के लिए प्रशासन ने 184 राहत शिविर और वितरण केंद्र खोले हैं। इन केंद्रों में वर्तमान में 28,695 लोग शरण लिए हुए हैं। इनमें 97 गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाएं तथा 42 दिव्यांगजन भी शामिल हैं। लोगों को निकालने के लिए एनडीआरएफ (NDRF) और एसडीआरएफ (SDRF) द्वारा 67 नावें तैनात की गई हैं।

बुनियादी ढांचे का भारी नुकसान सड़क संपर्क पूरी तरह कट चुका है। चराइदेव, शिवसागर और जोरहाट जिलों में कई सड़कों के हिस्से बह गए हैं। बाढ़ से 171 घर पूरी तरह धराशायी हो गए हैं, जबकि 4,467 घरों को आंशिक नुकसान पहुंचा है। नुमालीगढ़ में धनसिरी नदी अभी भी खतरे के निशान के ऊपर बह रही है।

सरकार की पैनी नजर राज्य सरकार स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है। प्रभावित इलाकों में प्रशासन द्वारा राशन और जरूरी सामान पहुंचाया जा रहा है। स्थानीय नेताओं के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा खुद स्थिति की निगरानी कर रहे हैं और प्रभावितों को हर संभव मदद का भरोसा दिया गया है। फिलहाल, बचाव और राहत कार्य तेजी से जारी हैं।

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