नीट (NEET) पेपर लीक के खिलाफ सड़कों पर उतरे छात्रों के लिए अब कानूनी लड़ाई का मोर्चा तैयार हो गया है। कांग्रेस ने इन विरोध-प्रदर्शनों में शामिल युवाओं के बचाव के लिए छात्रों की गूंज (CKG) नाम से एक लीगल SOS हेल्पलाइन शुरू की है। इस पूरी मुहिम की कमान जानी-मानी एक्टिविस्ट गुरमेहर कौर को सौंपी गई है।
क्या है कांग्रेस का मकसद? कांग्रेस का आरोप है कि मोदी सरकार ने प्रदर्शनकारी छात्रों को आश्वासन दिया था कि उन्हें हिरासत में नहीं लिया जाएगा और न ही कोई पुलिस कार्रवाई होगी। इसके बावजूद, बिहार और पश्चिम बंगाल सहित कई राज्यों में छात्रों के खिलाफ FIR दर्ज की गई है। इस हेल्पलाइन के जरिए पार्टी इन प्रभावित छात्रों को कानूनी सहायता और सुरक्षा कवच प्रदान करना चाहती है।
गुरमेहर कौर ही क्यों चुनी गईं? 29 वर्षीय गुरमेहर कौर को इस जिम्मेदारी के लिए चुनने के पीछे एक सोची-समझी रणनीति है। नीट विरोध-प्रदर्शन में Gen-Z (युवा पीढ़ी), शहरी वर्ग और युवा महिलाओं की भागीदारी सबसे अधिक थी। गुरमेहर खुद इसी वर्ग का प्रतिनिधित्व करती हैं। उनकी सक्रियता और जन-आंदोलनों से जुड़ाव कांग्रेस को युवाओं के साथ सीधा संवाद स्थापित करने और उनके आक्रोश को मज़बूत नेतृत्व देने में मदद करेगा।
कपिल सिब्बल का बड़ा कदम इस कानूनी जंग को धार देने के लिए वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने भी कदम बढ़ाया है। उन्होंने CJP (Citizens for Justice and Peace) फंड में 1 करोड़ रुपये देने का ऐलान किया है। साथ ही, देश भर के वकीलों से छात्रों को निशुल्क कानूनी मदद देने की अपील की गई है।
हेल्पलाइन और सरकारी रुख कांग्रेस ने छात्रों के लिए 98118-67474 नंबर जारी किया है। पार्टी के नेता राहुल गांधी ने इस पूरे मामले में सीधे तौर पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को जिम्मेदार ठहराया है। इस दबाव का असर भी दिखने लगा है; हाल ही में बिहार सरकार ने छात्रों के खिलाफ दर्ज मामले वापस लेने और गिरफ्तार किए गए लोगों को रिहा करने की घोषणा की है।
विवाद का केंद्र: Gen-Z का आक्रोश नीट पेपर लीक का मुद्दा सिर्फ एक परीक्षा का नहीं, बल्कि लाखों युवाओं के भविष्य का बन चुका है। प्रदर्शनों में शामिल युवाओं पर पुलिसिया कार्रवाई को लेकर देशभर में नाराजगी है। अब देखना यह होगा कि गुरमेहर कौर और कांग्रेस की यह कानूनी टीम, प्रशासनिक तंत्र के सामने छात्रों के अधिकारों की रक्षा करने में कितनी सफल होती है।
○ We unequivocally condemn all the attacks on students. The Modi government had promised during the negotiations that no student would be picked up and that there would be no police action against them.
— Congress (@INCIndia) July 27, 2026
○ But today, there is a list of FIRs that have been filed against… pic.twitter.com/lgBsQEZnnh
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