ओलंपिक गोल्ड का सपना: अनाहत सिंह ने हार्वर्ड की पढ़ाई छोड़ खेल पर लगाया दांव
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बड़ा फैसला: ओलंपिक की राह आसान करने के लिए लिया ब्रेक विश्व जूनियर स्क्वॉश चैंपियन अनाहत सिंह ने अपने भविष्य को लेकर एक बड़ा और साहसी फैसला लिया है। 18 वर्षीय इस खिलाड़ी ने 2028 के लॉस एंजिल्स ओलंपिक में पदक जीतने के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए हार्वर्ड विश्वविद्यालय में अपनी पढ़ाई को फिलहाल टाल दिया है। अनाहत अपनी बड़ी बहन अमीरा की तरह हार्वर्ड से उच्च शिक्षा लेना चाहती थीं, लेकिन अब उनका पूरा फोकस खेल पर है।

खेल ही प्राथमिकता अनाहत ने स्पष्ट किया कि कॉलेज से एक साल का ब्रेक लेना उनके करियर का एक महत्वपूर्ण पड़ाव है। उन्होंने कहा, मैं इस साल पढ़ाई के बजाय स्क्वॉश पर ध्यान केंद्रित करना चाहती हूं। लॉस एंजिल्स ओलंपिक से पहले यह समय मेरे खेल को निखारने के लिए बेहद अहम है। मैं यह सुनिश्चित करना चाहती हूं कि ओलंपिक में उतरते समय मैं अपने खेल के सर्वोच्च शिखर पर रहूं।

एशियाई खेलों पर पैनी नजर जूनियर विश्व चैंपियन बनने के बाद अनाहत की निगाहें अब जापान में होने वाले एशियाई खेलों पर टिकी हैं। इन खेलों में स्वर्ण पदक जीतना न केवल गौरव की बात होगी, बल्कि यह उन्हें ओलंपिक के लिए सीधे क्वालीफाई करने में भी मदद करेगा। इसके लिए उन्हें मलेशिया और जापान की शीर्ष खिलाड़ियों को मात देने की चुनौती का सामना करना होगा।

आत्मविश्वास से भरी अनाहत हालिया ऐतिहासिक जीत ने अनाहत का आत्मविश्वास सातवें आसमान पर पहुंचा दिया है। वे कहती हैं, विश्व चैंपियन बनने से मेरा कॉन्फिडेंस बढ़ा है। मैं एशियाई खेलों में उतरने वाली लगभग हर खिलाड़ी के खिलाफ खेल चुकी हूं, जिससे मुझे उनकी रणनीतियों का अंदाजा है। ओलंपिक में खेलना मेरा सपना है और मैं इसे सच करने के लिए पूरी मेहनत कर रही हूं।

पीवी सिंधू और पीएम मोदी से मिली प्रेरणा अनाहत अपने खेल के सफर में बैडमिंटन स्टार पीवी सिंधू को अपना आदर्श मानती हैं। वे कहती हैं, मैं 4-5 साल की उम्र से सिंधू को फॉलो कर रही हूं। उनकी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बधाई ने मुझे बेहद उत्साहित किया है। अनाहत के लिए पीएम मोदी का संदेश एक बड़ा सम्मान है, जिसने उन्हें देश के लिए और बेहतर करने की प्रेरणा दी है।

मिस्र के दबदबे को चुनौती स्वॉश की दुनिया में मिस्र का वर्चस्व रहा है, लेकिन अनाहत वहां के खिलाड़ियों का सामना करने से नहीं डरतीं। हालिया जूनियर चैंपियनशिप में उन्होंने क्वार्टर फाइनल से लेकर फाइनल तक मिस्र की खिलाड़ियों को हराकर अपनी श्रेष्ठता साबित की। अनाहत मानती हैं कि मिस्र के खिलाड़ियों का अनुशासन और ट्रेनिंग का स्तर बहुत ऊंचा है, जिससे उन्हें भी काफी कुछ सीखने को मिलता है।

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