पेपर लीक पर संसद में घमासान: जितेंद्र सिंह ने यूपीए सरकार के पुराने घाव कुरेदे, सख्त होगा नया कानून
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नई दिल्ली: देश में पेपर लीक की घटनाओं को रोकने और परीक्षा प्रणाली को फूलप्रूफ बनाने के लिए केंद्र सरकार ने संसद में पब्लिक एग्जामिनेशन (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन बिल, 2026 पेश किया है। इस पर चर्चा की शुरुआत करते हुए केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने न केवल कानून की सख्ती का ब्यौरा दिया, बल्कि पूर्ववर्ती यूपीए सरकार पर तीखे हमले भी किए।

लिस्ट गिनाने बैठा तो चर्चा ही नहीं हो पाएगी लोकसभा में चर्चा के दौरान जितेंद्र सिंह ने यूपीए शासनकाल के दौरान हुए पेपर लीक की एक लंबी सूची गिना दी। उन्होंने 2009 के रेलवे रिक्रूटमेंट बोर्ड, 2011 के AIEEE, 2012 के एम्स प्रवेश परीक्षा और 2013 की महाराष्ट्र सेकेंडरी सर्टिफिकेट परीक्षा का उदाहरण देते हुए कहा, अगर मैं इनकी पूरी लिस्ट बनाने बैठ जाऊं, तो इस बिल को लेकर चर्चा ही नहीं कर पाऊंगा।

NTA का क्रेडिट मोदी सरकार को जितेंद्र सिंह ने नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) के गठन का श्रेय भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को दिया। उन्होंने कहा कि 1992 और 2010 में एनटीए बनाने की सिफारिशें आई थीं, लेकिन राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी के कारण इसे टाला जाता रहा। उन्होंने कहा कि 2017 में पीएम मोदी ने इस कार्य को पूरा किया और इसके लिए सरकार की सराहना होनी चाहिए।

क्या-क्या बदल रहा है नए संशोधन में? सरकार ने परीक्षाओं की विश्वसनीयता बहाल करने के लिए सजा और जुर्माने के प्रावधानों को काफी सख्त कर दिया है:

फास्ट-ट्रैक कोर्ट की तैयारी जितेंद्र सिंह ने स्पष्ट किया कि छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। इसके लिए विशेष फास्ट-ट्रैक कोर्ट स्थापित किए जाएंगे। उन्होंने बताया कि अब मामलों की जांच और कानूनी प्रक्रिया को एक निश्चित समय सीमा में पूरा किया जाएगा, ताकि दोषियों को जल्द से जल्द सजा मिल सके।

यह बिल छात्रों के हितों की रक्षा के लिए सरकार की शून्य सहिष्णुता (Zero Tolerance) नीति का हिस्सा माना जा रहा है। अब देखना यह है कि विपक्ष इस पर अपनी क्या प्रतिक्रिया देता है।

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