प्रख्यात सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक हाल ही में जंतर-मंतर पर नीट पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था के खिलाफ 26 दिनों के अनशन को लेकर चर्चा में थे। अब इस आंदोलन के शांत होते ही उनकी पत्नी गीतांजलि आंग्मो एक बड़े विवाद के केंद्र में आ गई हैं। उनके हिंदू राष्ट्र और संविधान से जुड़े पुराने बयानों ने सोशल मीडिया पर नई बहस छेड़ दी है।
क्या है वायरल वीडियो का सच? सोशल मीडिया पर गीतांजलि आंग्मो का एक पुराना वीडियो वायरल हो रहा है, जो सुब्रमण्यम स्वामी के यूट्यूब चैनल के एक इंटरव्यू का हिस्सा है। इस वीडियो में आंग्मो संविधान से धर्मनिरपेक्ष (Secular) शब्द को हटाने की पैरवी करती नजर आ रही हैं। उन्होंने तर्क दिया है कि भारत में धर्म और राज्य को अलग नहीं किया जा सकता, क्योंकि भारतीय संस्कृति राजा ऋषि और फिलॉस्फर किंग की अवधारणा पर आधारित है।
संसदीय प्रणाली पर उठाए सवाल आंग्मो ने दार्शनिक श्री अरबिंदो का हवाला देते हुए भारत की मौजूदा संसदीय प्रणाली को देश के स्वधर्म के विपरीत बताया है। उनका मानना है कि भारत के लिए राष्ट्रपति प्रणाली, मजबूत पंचायत व्यवस्था और ढीले संघीय राज्य ज्यादा उपयुक्त हैं। उन्होंने राम मंदिर आंदोलन का समर्थन करते हुए इसे देश की सामूहिक चेतना के लिए आवश्यक करार दिया है।
वैचारिक टकराव और ट्रोलिंग की वजह सोनम वांगचुक लद्दाख के लिए छठी अनुसूची (संविधान का एक हिस्सा) की मांग को लेकर संवैधानिक अधिकारों के रक्षक के रूप में देखे जाते हैं। वहीं, उनकी पत्नी का संविधान के मूल ढांचे (धर्मनिरपेक्षता) को ही चुनौती देना लोगों को वैचारिक विरोधाभास लग रहा है। यही कारण है कि कल तक जो लोग वांगचुक के आंदोलन का समर्थन कर रहे थे, वे अब गीतांजलि के बयानों को लेकर उन पर पाखंड के आरोप लगा रहे हैं।
कौन हैं गीतांजलि आंग्मो? गीतांजलि जे. आंग्मो एक सफल सामाजिक उद्यमी और शिक्षाविद् हैं। ओडिशा में जन्मीं गीतांजलि ने मार्केटिंग और फाइनेंस में एमबीए किया है। वे स्वास्थ्य, शिक्षा और वेलनेस के क्षेत्र में कई संस्थाओं से जुड़ी रही हैं। 2017 में उन्होंने सोनम वांगचुक के साथ मिलकर लद्दाख में हिमालयन इंस्टीट्यूट ऑफ अल्टरनेटिव्स (HIAL) की स्थापना की। वे श्री अरबिंदो के दर्शन की अनुयायी हैं और स्वयं को ओडिसी नृत्य व कराटे में भी निपुण बताती हैं।
आलोचकों को दिया था जवाब जब सोनम वांगचुक अनशन पर थे, तब गीतांजलि ने हर कदम पर उनका बचाव किया था। उन्होंने अनशन के दौरान आलोचकों को 26 दिन भूखे रहकर दिखाने की चुनौती दी थी। बयानों पर मचे बवाल के बीच, गीतांजलि ने हाल ही में भारतीय छात्रों की प्रशंसा करते हुए उन्हें सनातन धर्म को अपने जीवन में उतारने वाला बताया है। फिलहाल, इस पूरे घटनाक्रम ने वांगचुक दंपत्ति को एक नई राजनीतिक और वैचारिक अग्निपरीक्षा में डाल दिया है।
I have compiled multiple clips from a programme on Subramanian Swamy s YouTube channel featuring Gitanjali Angmo — co-founder of the Himalayan Institute of Alternatives, Ladakh. In it, she calls for removing secular from the Constitution, wants Sanskrit as the national… pic.twitter.com/QubWZitIEs
— Pratik Sinha (@free_thinker) July 27, 2026
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