PoK में भड़की हिंसा: प्रदर्शनकारियों पर सेना की गोलीबारी, आंदोलन संस्थापक के भाई समेत 14 की मौत
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रावलकोट: पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में स्थिति बेहद विस्फोटक हो गई है। अवामी हुकूक लॉन्ग मार्च के दौरान सोमवार शाम रावलकोट में पाकिस्तानी सुरक्षा बलों द्वारा की गई कथित गोलीबारी में 14 लोगों की जान चली गई है। इस घटना से पूरे क्षेत्र में आक्रोश फैल गया है।

आंदोलन के केंद्र में बड़ा हमला जॉइंट अवामी एक्शन कमिटी (JAAC) के वरिष्ठ सदस्य इम्तियाज़ असलम ने पुष्टि की है कि सुरक्षा बलों की गोलीबारी में मारे गए लोगों में आंदोलन के संस्थापक उमर नज़ीर कश्मीरी के छोटे भाई उस्मान नज़ीर भी शामिल हैं। असलम के अनुसार, प्रदर्शनकारियों का काफिला चिनार चौक से आगे बढ़ रहा था, तभी उन पर सीधे गोलियां बरसाई गईं।

खून से लथपथ हुआ लॉन्ग मार्च इस बर्बर कार्रवाई में कम से कम दो दर्जन लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं। मृतकों में खैगाला, कोटली, टट्टापानी और हवेली जैसे इलाकों के युवा शामिल हैं। दावा किया जा रहा है कि मरने वालों में दो बलूच प्रदर्शनकारी भी शामिल हैं, जो इस आंदोलन को समर्थन देने आए थे।

अत्याचार और नरसंहार का आरोप इम्तियाज़ असलम ने पाकिस्तानी प्रशासन पर नरसंहार करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा, राज्य घबराहट में है और निहत्थे युवाओं पर गोलियां चला रहा है। उन्होंने विदेशों में बसे कश्मीरियों और अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों से अपील की है कि वे पाकिस्तानी दूतावासों के बाहर प्रदर्शन करें और इस क्रूरता को दुनिया के सामने लाएं।

इंटरनेट बंदी और दमनकारी नीतियां क्षेत्र में तनाव को देखते हुए प्रशासन ने इंटरनेट और मोबाइल सेवाओं को ठप कर दिया है, जिससे सूचनाओं का आदान-प्रदान मुश्किल हो गया है। बावजूद इसके, प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वे पीछे नहीं हटेंगे। ट्रांसपोर्ट की सुविधा न होने के कारण अब लोग पैदल ही मुज़फ़्फ़राबाद की ओर कूच कर रहे हैं।

शांतिपूर्ण प्रदर्शन का दावा प्रदर्शनकारियों ने मौके से वीडियो जारी कर दावा किया है कि वे शांतिपूर्ण तरीके से अपने अधिकारों की मांग कर रहे थे। एक चश्मदीद ने कहा, हमारे हाथों में सफेद झंडे थे और हम शांति के साथ आगे बढ़ रहे थे, लेकिन सेना ने बिना उकसावे के हमारे युवाओं को निशाना बनाया।

मुज़फ़्फ़राबाद की ओर बढ़ा कारवां गोलीबारी और जानमाल के नुकसान के बावजूद, प्रदर्शनकारियों ने हार नहीं मानी है। जत्था आज रात मकबूल भट्ट शहीद चौक पर पड़ाव डालेगा। प्रदर्शनकारियों का लक्ष्य आने वाले तीन से चार दिनों में मुज़फ़्फ़राबाद पहुंचना है। इस घटना ने शहबाज शरीफ सरकार के लिए PoK में नियंत्रण बनाए रखने की चुनौती को कई गुना बढ़ा दिया है।

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