गरीबी से सिल्वर मेडल तक का सफर: कॉमनवेल्थ में छा गईं राजनांदगांव की बेटी ज्ञानेश्वरी यादव
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ग्लास्गो कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत का परचम बुलंद हो गया है। वेटलिफ्टिंग में छत्तीसगढ़ की होनहार खिलाड़ी ज्ञानेश्वरी यादव ने 53 किग्रा भार वर्ग में रजत पदक (Silver Medal) जीतकर देश का गौरव बढ़ाया है। ज्ञानेश्वरी ने कुल 199 किग्रा वजन उठाकर अपने करियर का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया, जो उनकी कड़ी मेहनत का प्रमाण है।

इलेक्ट्रीशियन पिता का संघर्ष ज्ञानेश्वरी की यह जीत किसी फिल्म की कहानी से कम नहीं है। उनके पिता दीपक यादव एक प्राइवेट इलेक्ट्रीशियन हैं। आर्थिक तंगी के बावजूद उन्होंने अपनी बेटी के खेल के प्रति जुनून को कभी कम नहीं होने दिया। शुरुआती दिनों में पिता और बेटी गांव गोरिया से शहर तक का लंबा रास्ता साइकिल से तय करते थे, ताकि ज्ञानेश्वरी की ट्रेनिंग में कोई बाधा न आए।

आर्थिक तंगी और डाइट की चुनौती वेटलिफ्टिंग एक महंगा खेल है, जिसमें पौष्टिक डाइट की बहुत आवश्यकता होती है। एक सामान्य आय वाले परिवार के लिए यह खर्च उठाना पहाड़ जैसा था। कोविड-19 महामारी के दौरान परिवार पर आर्थिक संकट और गहरा गया, लेकिन ज्ञानेश्वरी और उनके पिता ने हार मानने से इनकार कर दिया। सीमित संसाधनों में भी वे अपनी ट्रेनिंग पर अडिग रहीं।

छह घंटे पसीना और अटूट अनुशासन ज्ञानेश्वरी की सफलता के पीछे उनकी वर्षों की तपस्या है। शाकाहारी पृष्ठभूमि और आधुनिक उपकरणों के अभाव के बावजूद, उन्होंने रोजाना 6 घंटे कड़ी मेहनत की। उनकी यही निरंतरता उन्हें छोटे से गांव से उठाकर अंतरराष्ट्रीय मंच तक ले आई।

मीराबाई चानू से मिली प्रेरणा जूनियर वर्ल्ड वेटलिफ्टिंग चैंपियनशिप में तीन रजत पदक जीतकर सुर्खियां बटोरने वाली ज्ञानेश्वरी ने मीराबाई चानू के साथ प्रतिस्पर्धा करके खुद को साबित किया। राष्ट्रीय स्तर पर दिग्गज एथलीटों को टक्कर देने के बाद, आज वह खुद एक प्रेरणा बन चुकी हैं। उनकी असाधारण प्रतिभा को देखते हुए छत्तीसगढ़ सरकार ने उन्हें राज्य पुलिस सेवा में एएसआई (ASI) के पद पर भी नियुक्त किया है।

सपना पूरा हुआ पदक जीतने के बाद ज्ञानेश्वरी ने कहा, यह मेरा पहला कॉमनवेल्थ गेम्स है और मैं बहुत खुश हूं। मेरा लक्ष्य सिर्फ अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करना था और मैंने वही किया। आज उनकी यह सफलता उन हजारों युवाओं के लिए एक मिसाल है, जो अभावों में जी रहे हैं लेकिन अपने सपनों को आसमान देना चाहते हैं।

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