इस्तीफा ही समाधान नहीं एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक ने पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए इसे व्यवस्था सुधार की दिशा में महज पहला कदम बताया है। गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल से डिस्चार्ज होने के बाद सोमवार, 27 जुलाई 2026 को राजघाट पहुंचे वांगचुक ने कहा कि इसे किसी मुद्दे का अंत नहीं, बल्कि एक बड़ी प्रक्रिया की शुरुआत माना जाना चाहिए।
रचनात्मक बातचीत की उम्मीद वांगचुक का मानना है कि यदि शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मसलों पर सरकार रचनात्मक बातचीत करे, तो देश एक अधिक प्रभावी और मजबूत शैक्षणिक तंत्र की ओर बढ़ सकता है। उन्होंने जोर दिया कि अब जो भी फैसले लिए जाएं, वे जनता की भावनाओं के अनुरूप और राष्ट्रीय हित में होने चाहिए।
प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई न हो वांगचुक ने अधिकारियों से अपील की कि वे लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज उठाने वाले शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों का सम्मान करें। उन्होंने आग्रह किया कि अहिंसक विरोध में शामिल छात्रों या नागरिकों के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं होनी चाहिए, क्योंकि यह उनका संवैधानिक अधिकार है।
राजघाट को क्यों चुना? अस्पताल से निकलने के बाद वांगचुक ने अपनी पहली मंजिल के रूप में राजघाट को चुना। महात्मा गांधी की समाधि पर श्रद्धांजलि देते हुए उन्होंने कहा कि 26 दिनों के कठिन अनशन के बाद बापू का सानिध्य उन्हें शांति और प्रेरणा देता है। उन्होंने दोहराया कि सत्य और अहिंसा के गांधीवादी सिद्धांत आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं।
धैर्य और शांति की जीत सोनम वांगचुक ने आगे कहा कि लद्दाख में वे और उनके साथी बरसों से शांतिपूर्ण तरीकों से अपनी मांगें रखते आए हैं और उन्हें खुशी है कि पूरा देश भी अब इसी रास्ते पर चल रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि कोई भी बड़ा बदलाव हिंसा से नहीं, बल्कि धैर्य और त्याग से ही हासिल किया जा सकता है।
लद्दाख वापसी NEET-UG 2026 पेपर लीक मामले को लेकर हुए लंबे विरोध प्रदर्शन के दौरान स्वास्थ्य बिगड़ने पर उन्हें जंतर-मंतर से उठाकर अस्पताल भर्ती कराया गया था। अब पूरी तरह स्वस्थ होने के बाद, वांगचुक दिल्ली से अपने घर लद्दाख लौट गए हैं। उन्होंने लोगों से अपील की है कि वे हमेशा लोकतांत्रिक और अहिंसक तरीके से अपनी मांगें उठाते रहें।
#WATCH | Delhi | Activist Sonam Wangchuk says, I wish to congratulate the youth, the common people, and all the citizens of this country. I also congratulate the elders, people of all ages, and the young organisers who carried this movement forward so peacefully. We must… pic.twitter.com/JtSJkJabgK
— ANI (@ANI) July 27, 2026
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