जंतर-मंतर से संसद तक गूंज, क्या चुनाव लड़ने की उम्र 21 साल होगी? देश की राजनीति में छाया Gen Z का जलवा
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दिल्ली के जंतर-मंतर पर हाल ही में हुए छात्र आंदोलन ने देश की पूरी राजनीतिक दिशा बदल दी है। पेपर लीक और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर हुए इस प्रदर्शन के बाद, सत्ता और विपक्ष दोनों ही Gen Z (युवा पीढ़ी) को साधने में जुट गए हैं। अब चर्चा इस बात की है कि क्या भविष्य में चुनाव लड़ने की न्यूनतम उम्र 25 से घटाकर 21 साल कर दी जाएगी।

PM मोदी का डिजिटल दांव

छात्रों के आंदोलन के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने युवाओं से जुड़ने के लिए इंस्टाग्राम को अपना मुख्य जरिया बनाया है। हाल ही में उनका एक वीडियो रिकॉर्ड 303 मिलियन व्यूज के साथ वायरल हुआ। पीएम ने अपने मंत्रियों को भी सोशल मीडिया पर सक्रिय होने का निर्देश दिया है। हाल ही में विकसित वाइब्रेंट विलेज कार्यक्रम के तहत उन्होंने युवाओं से संवाद करते हुए उन्हें देशहित में काम करने के लिए प्रेरित किया।

बीजेपी का युवा संवाद और विपक्ष का मोर्चा

प्रधानमंत्री की राह पर चलते हुए, बीजेपी ने दिल्ली में युवा संवाद (Gen-Z with Modi) कार्यक्रम आयोजित किया। इसमें शामिल छात्रों ने जंतर-मंतर के आंदोलन पर मिली-जुली प्रतिक्रिया दी। वहीं दूसरी ओर, बिहार की बांकीपुर सीट पर होने वाले उपचुनाव में युवा मतदाताओं पर पूरा ध्यान केंद्रित है। प्रशांत किशोर जैसे नेता युवाओं को साथ लेकर सरकार पर निशाना साध रहे हैं, जबकि मनोज तिवारी जैसे बीजेपी नेता छात्रों के साथ सेल्फी और संवाद के जरिए अपनी पैठ बना रहे हैं।

राहुल गांधी की सक्रियता

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी भी लगातार छात्रों के पक्ष में खड़े नजर आ रहे हैं। पेपर लीक और लाठीचार्ज के मामले में उन्होंने सरकार को घेरते हुए कहा कि अब रील्स से युवाओं का वक्त बर्बाद करने के बजाय, दोषियों पर कार्रवाई और माफी की जरूरत है। वे लगातार छात्रों के हक में आवाज उठा रहे हैं।

चुनाव लड़ने की उम्र घटाने की मांग

सियासी गलियारों में अब एक नई मांग जोर पकड़ रही है—चुनाव लड़ने की उम्र 25 से घटाकर 21 साल करना। तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी ने इस मांग को नई धार दी है। उनका तर्क है कि यदि 21 साल का युवा IAS या IPS अधिकारी बन सकता है, तो वह चुनाव लड़ने के योग्य क्यों नहीं? तेलंगाना सरकार इसके लिए विधानसभा में विशेष सत्र बुलाकर केंद्र को प्रस्ताव भेजने की तैयारी में है।

यह साफ है कि देश का युवा अब केवल दर्शक नहीं है, बल्कि अपनी मांगों को लेकर मुखर है। जंतर-मंतर से उठी यह चिंगारी अब आगामी चुनावों की रूपरेखा तय करने लगी है।

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