असम और गुजरात में कुदरत का तांडव: बाढ़ से 93 मौतें, 7 लाख से ज्यादा लोग बेघर
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देश के दो मुख्य राज्यों असम और गुजरात में मूसलाधार बारिश और बाढ़ ने भारी तबाही मचा रखी है। दोनों राज्यों में प्राकृतिक आपदा के चलते अब तक कुल 93 लोगों की जान जा चुकी है, जबकि लाखों लोग अपना घर-बार छोड़कर राहत शिविरों में शरण लेने को मजबूर हैं। प्रभावित क्षेत्रों में सेना, एनडीआरएफ (NDRF) और तटरक्षक बल युद्धस्तर पर राहत कार्य चला रहे हैं।

असम में बाढ़ का भयावह मंजर, 62 लोगों ने तोड़ा दम

असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की रिपोर्ट के अनुसार, राज्य में बाढ़ से मरने वालों की संख्या बढ़कर 62 हो गई है। पिछले 24 घंटों में ही 14 लोगों की जान गई है। चराइदेव, शिवसागर और जोरहाट जिले सबसे ज्यादा प्रभावित हैं।

राज्य के 12 जिलों में लगभग 7 लाख लोग बाढ़ की चपेट में हैं। लगभग 856 गांवों का संपर्क कट चुका है और 56 हजार हेक्टेयर से अधिक कृषि भूमि पानी में डूब गई है। ब्रह्मपुत्र और उसकी सहायक नदियां अभी भी खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं, जिससे स्थिति गंभीर बनी हुई है।

गुजरात में बारिश का कहर, 31 की मौत

गुजरात में भारी बारिश और बाढ़ जनित हादसों ने 31 लोगों की जान ले ली है। नवसारी और वलसाड जिले इस आपदा से सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। नवसारी में 15 और वलसाड में 7 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है।

पानी का स्तर घटने के बाद अब इन इलाकों में कीचड़ और मलबे की चुनौती सामने है। प्रशासन ने बीमारियों के प्रसार को रोकने के लिए सैनिटाइजेशन और शुद्ध पेयजल की आपूर्ति के काम को प्राथमिकता पर रखा है।

38 हजार लोगों का रेस्क्यू, ठप हुआ रेल यातायात

गुजरात में राहत कार्य तेज कर दिए गए हैं। अब तक 38,000 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया है। तटरक्षक बल के हेलीकॉप्टरों ने नवसारी में फंसे 60 झींगा फार्म कर्मचारियों को एयरलिफ्ट कर नई जिंदगी दी है।

बाढ़ का बड़ा असर रेल यातायात पर भी पड़ा है। पटरियों पर पानी भरने के कारण 50 से अधिक ट्रेनें रद्द कर दी गई हैं, जबकि 25 से ज्यादा ट्रेनों को बीच रास्ते में ही रोकना पड़ा है।

अलर्ट पर प्रशासन, जारी है बचाव अभियान

मौसम विभाग ने असम और गुजरात में अगले कुछ दिनों के लिए अलर्ट जारी रखा है। राहत शिविरों में भोजन, दवाइयों और जरूरी सुविधाओं का प्रबंध किया जा रहा है। NDRF और सेना की टीमें किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए तैनात हैं, ताकि जान-माल के नुकसान को न्यूनतम रखा जा सके।

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