NEET पेपर लीक: सोनम वांगचुक का अनशन खत्म, NTA में बड़ा बदलाव; क्या अब थम जाएगा छात्रों का आंदोलन?
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नई दिल्ली: देश की युवा शक्ति पिछले 27 दिनों से जंतर-मंतर पर लीक-प्रूफ परीक्षाओं की मांग को लेकर डटी हुई है। इस आंदोलन का मुख्य चेहरा रहे सोनम वांगचुक ने 26 दिनों के आमरण अनशन के बाद अपना अनशन तोड़ दिया है, लेकिन कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) अभी भी आंदोलन जारी रखने पर अड़ी हुई है। इस बीच, सरकार ने पेपर लीक माफिया के खिलाफ अब तक का सबसे बड़ा एक्शन शुरू कर दिया है।

सरकार का बड़ा एक्शन: NTA के 47 अधिकारी बर्खास्त

NEET पेपर लीक मामले की गंभीरता को देखते हुए सरकार ने नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) के खिलाफ सख्त कदम उठाए हैं। शिक्षा मंत्रालय ने NTA के 47 अधिकारियों को सेवा से हटा दिया है। इनमें से कई के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई की तैयारी है। इससे पहले शिक्षा सचिव विनीत जोशी को भी हटाया जा चुका है।

NTA का ढांचा: सिर्फ 24 स्थायी कर्मचारी?

संसद में दी गई जानकारी के अनुसार, देश भर में करोड़ों छात्रों का भविष्य तय करने वाली NTA संस्था का पूरा स्थायी ढांचा महज 24 लोगों के भरोसे है। बाकी कामकाज 73 संविदा और 124 आउटसोर्स कर्मचारियों के सहारे चल रहा है। यानी संस्था का 90% संचालन अस्थायी व्यवस्था पर टिका है। अब सरकार NTA को UPSC की तर्ज पर पुनर्गठित करने की तैयारी कर रही है ताकि जवाबदेही सुनिश्चित हो सके।

कड़ा होगा कानून: 10 साल की सजा और फास्ट ट्रैक कोर्ट

पेपर लीक पर लगाम लगाने के लिए सरकार सार्वजनिक परीक्षा अनुचित साधनों की रोकथाम अधिनियम, 2024 में संशोधन ला रही है। इसे सोमवार तक संसद में पेश किया जा सकता है। नए नियमों में:

सरकार और CJP के बीच जारी है गतिरोध

गुरुग्राम के अस्पताल में सोनम वांगचुक के अनशन तोड़ने के बाद, सरकार और CJP के बीच दिल्ली में दूसरे दौर की वार्ता हुई। CJP ने तीन प्रमुख मांगें रखी हैं: शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा, पीड़ित परिवारों को 1 करोड़ रुपये का मुआवजा और प्रदर्शनकारियों पर दर्ज FIR की वापसी।

मुआवजे और FIR वापसी पर सैद्धांतिक सहमति बनती दिख रही है, लेकिन शिक्षा मंत्री के इस्तीफे पर पेंच फंसा हुआ है। कल (शनिवार) दोनों पक्षों के बीच तीसरे दौर की बैठक होनी है, जो इस आंदोलन का भविष्य तय करेगी।

सोनम वांगचुक ने क्यों तोड़ा अनशन?

सोनम वांगचुक ने 65 सांसदों के आग्रह और छात्रों के हित में अपना अनशन समाप्त किया। उन्हें सरकार की ओर से प्रदर्शनकारियों पर कानूनी कार्रवाई न करने और पीड़ित परिवारों की आर्थिक मदद का भरोसा मिला है। अब सबकी नजरें कल होने वाली बैठक पर हैं, जहां यह तय होगा कि क्या शिक्षा मंत्री के मुद्दे पर सरकार और आंदोलनकारी किसी मध्य मार्ग पर पहुँच पाएंगे।

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