पेपर लीक पर मोदी सरकार का कड़ा प्रहार: दोषियों को 10 साल की जेल और ₹10 करोड़ का जुर्माना
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NEET-UG पेपर लीक विवाद के बीच केंद्र सरकार ने परीक्षाओं की शुचिता बनाए रखने के लिए एक बड़ा और सख्त कदम उठाया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आयोजित कैबिनेट बैठक में पब्लिक एग्जामिनेशंस (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) एक्ट, 2024 में संशोधन को मंजूरी दे दी गई है।

3 महीने में फैसला, फास्ट ट्रैक कोर्ट का गठन

नए संशोधनों के अनुसार, पेपर लीक और नकल जैसे मामलों की सुनवाई के लिए स्पेशल फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाई जाएंगी। इन अदालतों को यह कानूनी अधिकार होगा कि वे जांच पूरी होने के महज 3 महीने के भीतर दोषियों को सजा सुना सकें। इस कानून का उद्देश्य मुकदमों को वर्षों तक चलने से रोकना है।

कड़े दंड का प्रावधान

सरकार ने दोषियों पर नकेल कसने के लिए दंड को बेहद कठोर कर दिया है। नए प्रावधानों के तहत पेपर लीक में दोषी पाए जाने पर 10 साल तक की जेल और 10 करोड़ रुपये तक के भारी जुर्माने का प्रस्ताव है। सरकार इसे 27 जुलाई को संसद में पेश करने की तैयारी में है।

सरकार बनाम विपक्ष: संसद में टकराव के आसार

केंद्रीय मंत्री किरण रिजिजू ने स्पष्ट किया है कि सरकार छात्रों के भविष्य को लेकर गंभीर है और इस बिल में कोई देरी नहीं चाहती। उन्होंने विपक्ष, विशेषकर कांग्रेस को चेतावनी दी कि यदि संसद की कार्यवाही में बाधा डाली गई, तो इसका खामियाजा देश के युवाओं को भुगतना पड़ेगा।

प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांगें

दूसरी ओर, कॉन्स्टिट्यूशन क्लब ऑफ इंडिया में प्रदर्शनकारी छात्रों (CJP) और केंद्रीय मंत्रियों के बीच वार्ता हुई है। छात्रों ने तीन प्रमुख मांगें रखी हैं:

  1. शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा या उन्हें मंत्रिमंडल से हटाया जाए।
  2. NEET विवाद के चलते आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को ₹1 करोड़ का मुआवजा मिले।
  3. प्रदर्शनकारी छात्रों पर दर्ज सभी FIR वापस ली जाएं और भविष्य में कार्रवाई न करने की लिखित गारंटी दी जाए।

सरकार का रुख सकारात्मक

प्रदर्शनकारी छात्रों के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास के अनुसार, सरकार ने मुआवजा और FIR वापस लेने की मांगों पर सैद्धांतिक रूप से सकारात्मक रुख दिखाया है। अब सबकी निगाहें शनिवार को होने वाली अगली बैठक पर हैं, जहां शिक्षा मंत्री के इस्तीफे और बाकी मांगों पर सरकार का अंतिम रुख तय होगा।

पीएम vs राहुल: वीडियो संदेश पर सियासत

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वीडियो संदेश जारी कर कहा कि सरकार ने पिछले ढाई महीनों में दोषियों को जेल भेजा है और छात्रों का साल बचाने के लिए तेजी से परिणाम जारी किए हैं। वहीं, राहुल गांधी ने इसे बेकार वीडियो करार देते हुए धर्मेंद्र प्रधान की बर्खास्तगी की मांग पर जोर दिया है।

फिलहाल, सीबीआई जांच जारी है और 13 गिरफ्तारियां हो चुकी हैं, लेकिन जंतर-मंतर पर डटे छात्रों का गुस्सा केवल कड़े कानूनों से शांत होगा या धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे जैसे बड़े फैसले से, यह आने वाला समय ही बताएगा।

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