संसद का मानसून सत्र शुरू होने से ठीक एक दिन पहले बुलाई गई सर्वदलीय बैठक हंगामेदार रही। केंद्र सरकार द्वारा बुलाई गई इस बैठक की शुरुआत होते ही विपक्षी दलों ने एकजुट होकर वॉकआउट कर दिया। इस घटना ने सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच पहले से चल रहे टकराव को और गहरा कर दिया है।
क्यों नाराज हुआ विपक्ष? विपक्ष के वॉकआउट का मुख्य कारण NCPI (National Congress Party - India) को बैठक में आमंत्रित करना था। कांग्रेस, टीएमसी, सपा, डीएमके, जेएमएम, आम आदमी पार्टी, नेशनल कॉन्फ्रेंस, वाम दल और शिवसेना (यूबीटी) के नेताओं ने इस फैसले पर कड़ा विरोध जताया।
महुआ मोइत्रा ने उठाए गंभीर सवाल टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने स्पष्ट किया कि विपक्ष ने यह कदम एनसीपीआई को दी गई मान्यता के विरोध में उठाया है। मोइत्रा के अनुसार, जिन 20 सांसदों को एनसीपीआई के नाम पर बैठक में बुलाया गया है, उनके विलय को अभी तक लोकसभा अध्यक्ष की आधिकारिक मंजूरी नहीं मिली है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब इन सांसदों की अयोग्यता से जुड़ी याचिकाएं लंबित हैं, तो संसदीय कार्य मंत्री ने किस आधार पर उन्हें इस बैठक में शामिल होने का निमंत्रण दिया।
टीएमसी सांसद काकोली घोष का दावा विपक्ष के आरोपों के बीच सांसद काकोली घोष दस्तिदार ने स्थिति पर अपना पक्ष रखा। उन्होंने दावा किया कि टीएमसी के 20 सांसदों का एनसीपीआई में विलय हो चुका है और लोकसभा अध्यक्ष ने इसे स्वीकार कर लिया है। उन्होंने आगे कहा कि सदन में इन सांसदों के लिए जल्द ही अलग बैठने की व्यवस्था की जाएगी। उनके इस बयान ने विवाद को और हवा दे दी है।
बेअसर रही बैठक का एजेंडा केंद्र सरकार का उद्देश्य इस बैठक के जरिए संसद के मानसून सत्र के कामकाज और महत्वपूर्ण एजेंडा पर चर्चा करना था। हालांकि, एनसीपीआई को लेकर हुए इस विवाद ने मूल एजेंडे को पूरी तरह दरकिनार कर दिया। विपक्ष के अचानक बैठक से बाहर निकलने के फैसले ने संसद सत्र शुरू होने से पहले ही राजनीतिक माहौल को बेहद गर्म कर दिया है।
#WATCH | Delhi: TMC MP Mahua Moitra says, Today, the entire opposition including Congress, the Samajwadi Party, DMK, JMM, Aam Aadmi Party, National Conference, Left parties, Shiv Sena UBT have all walked out of the all party meeting in protest because the so-called NCPI, which… pic.twitter.com/I3b3sdjqVK
— ANI (@ANI) July 19, 2026
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