हरियाणा के जींद रेलवे स्टेशन से 17 जुलाई को एक ऐतिहासिक सफर की शुरुआत हुई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन को हरी झंडी दिखाई। यह ट्रेन जींद से सोनीपत के बीच 89 किलोमीटर के रूट पर चलेगी। इस ट्रेन की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह न तो डीजल पर चलती है और न ही बिजली पर।
यह ट्रेन न केवल धुआं मुक्त है, बल्कि यह दुनिया की सबसे ताकतवर हाइड्रोजन ट्रेनों में गिनी जाएगी। यह जर्मनी की मूल हाइड्रोजन ट्रेन की तुलना में करीब पांच गुना लंबी है और एक बार में 2600 यात्रियों को ले जाने में सक्षम है।
हाइड्रोजन की कहानी 1776 में लंदन की एक लैब से शुरू हुई थी। वैज्ञानिक हेनरी कैवेंडिश ने जब जिंक धातु को तेजाब में डाला, तो एक रंगहीन गैस निकली। जब उन्होंने इसे जलाया, तो पानी की बूंद बनी। इसी से पता चला कि जिस पानी को हम पीते हैं, उसी में वह ऊर्जा छिपी है जो आज ट्रेनों को चला रही है।
फ्रांस के एक रसायनज्ञ ने हाइड्रोजन का नामकरण किया। ग्रीक भाषा में हाइड्रो का अर्थ है पानी और जेनेस का अर्थ है जन्मा । यानी हाइड्रोजन का मतलब हुआ पानी से जन्मा । 18वीं शताब्दी में वैज्ञानिकों ने इलेक्ट्रोलिसिस प्रक्रिया खोजी, जिससे पानी से ऑक्सीजन और हाइड्रोजन को अलग किया जाने लगा।
1838 में विलियम ग्रोव ने हाइड्रोजन और ऑक्सीजन को मिलाकर बिजली पैदा करने की तकनीक खोजी, जिसे दुनिया का पहला फ्यूल सेल कहा गया। इसी वजह से ग्रोव को फादर ऑफ द फ्यूल सेल कहा जाता है।
हाइड्रोजन के इतिहास में 1937 का हिंडनबर्ग हादसा एक काला अध्याय है। हाइड्रोजन गैस से भरा एक विशालकाय एयरशिप आग का गोला बन गया था। इस हादसे ने हाइड्रोजन की ज्वलनशील प्रवृत्ति को उजागर किया, जिससे कुछ समय के लिए इस पर काम धीमा पड़ गया। लेकिन 1973 के तेल संकट ने दुनिया को फिर से हाइड्रोजन की ओर सोचने पर मजबूर कर दिया।
दुनिया में हाइड्रोजन ट्रेन की तकनीक बहुत नई है। 2018 में जर्मनी ने पहली कमर्शियल हाइड्रोजन ट्रेन चलाई थी। हालांकि, चुनौतियां भी कम नहीं हैं। जर्मनी ने 2024 के अंत तक अपनी कई हाइड्रोजन ट्रेनें सेवा से हटा दीं। वहीं, जापान, चीन और अमेरिका में भी इसका परीक्षण अभी सीमित स्तर पर ही है।
भारत का लक्ष्य इस तकनीक को हेरिटेज और पहाड़ी रूटों पर उतारने का है, जहाँ बिजली की लाइनें बिछाना मुश्किल है और डीजल का धुआं प्रदूषण फैलाता है। यदि जींद-सोनीपत रूट पर यह प्रयोग सफल होता है, तो भारत इसे बड़े पैमाने पर अपना सकता है। हालांकि, तकनीकी सफलता और लागत के आधार पर ही भविष्य में इस पर अंतिम फैसला लिया जाएगा।
*#WATCH | Haryana: A trial run of a hydrogen train took place today between Delhi and Jind. The trial focused on emergency braking distance and oscillation.
— ANI (@ANI) June 26, 2026
(Source: Indian Railways) pic.twitter.com/2UCcK1I6rH
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