ईरान का अमेरिका पर भीषण पलटवार: कुवैत के सैन्य अड्डों पर आत्मघाती ड्रोन से हमला, मची भारी तबाही
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मध्य-पूर्व में तनाव चरम पर पहुंच गया है। ईरान ने कुवैत में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर आत्मघाती ड्रोन्स (Kamikaze Drones) से बड़े पैमाने पर हमले किए हैं। ईरानी सरकार का कहना है कि यह सैन्य कार्रवाई उसकी जमीन पर किए गए अमेरिकी हवाई हमलों का सीधा और कड़ा जवाब है। इस घटना के बाद पूरे क्षेत्र में हड़कंप मच गया है।

अमेरिकी गोला-बारूद डिपो और रडार सिस्टम को बनाया निशाना ईरानी सेना ने कुवैत के दो प्रमुख केंद्रों को मुख्य रूप से निशाना बनाया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, कैंप उदैरी (Camp Buehring) में स्थित अमेरिकी सेना के गोला-बारूद डिपो पर भीषण हमला किया गया।

इसके अलावा, अली अल सलेम एयरबेस पर तैनात अत्याधुनिक पैट्रियट रडार सिस्टम और एयर सर्विलांस रडार को भी निशाना बनाया गया। इन हमलों का स्पष्ट उद्देश्य अमेरिकी रक्षा प्रणालियों को पंगु बनाना और उनकी रसद आपूर्ति को नष्ट करना था।

जॉर्डन हमले का बदला और सैन्य टकराव पेंटागन के अनुसार, यह हमला शनिवार और रविवार की रात ईरान पर किए गए अमेरिकी हवाई हमलों के प्रत्युत्तर में हुआ है। अमेरिका ने यह ऑपरेशन जॉर्डन में अपने एयरबेस पर हुए मिसाइल हमले का बदला लेने के लिए शुरू किया था, जिसमें दो अमेरिकी सैनिकों की मौत हो गई थी।

ईरान का आरोप है कि अमेरिका लगातार उनकी संप्रभुता का उल्लंघन कर रहा है, जिसके जवाब में यह आक्रामक रुख अपनाया गया है।

बढ़ता मानवीय संकट और हताहतों का आंकड़ा इस संघर्ष की कीमत मानवीय स्तर पर भी भारी पड़ रही है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, ईरान के साथ चल रही इस खींचतान में अब तक 16 अमेरिकी सैनिक अपनी जान गंवा चुके हैं और 430 से अधिक जवान घायल हुए हैं। कुवैत के अलावा इराक में भी ड्रोन हमलों की खबरें सामने आ रही हैं, जिससे सुरक्षा चिंताएं और बढ़ गई हैं।

युद्ध की ओर बढ़ता मध्य-पूर्व विशेषज्ञों का मानना है कि अब अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता की संभावनाएं लगभग खत्म हो चुकी हैं। दोनों ही देश एक-दूसरे की रेड लाइन्स को पार कर चुके हैं।

ईरान ने चेतावनी दी है कि यदि अमेरिका ने उनके शीर्ष नेतृत्व को दी जा रही धमकियों को जारी रखा, तो उन्हें और भी भारी नुकसान उठाना पड़ेगा। वहीं, अमेरिका अपनी सैन्य उपस्थिति और हितों की रक्षा के लिए जवाबी हमलों को और तेज करने की योजना बना रहा है, जिससे पूरा क्षेत्र सीधे सैन्य टकराव की ओर बढ़ गया है।

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