वापस आ जाओ, मैं इस्तीफा दे दूंगा : अभिषेक बनर्जी ने बागियों को दी खुली चुनौती
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पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर जारी उथल-पुथल के बीच पार्टी महासचिव अभिषेक बनर्जी ने बागी नेताओं पर बड़ा हमला बोला है। कोलकाता के कालीघाट में मीडिया से बात करते हुए उन्होंने पार्टी छोड़ने वाले नेताओं को एक चौंकाने वाली चुनौती दी है।

अभिषेक की खुली चुनौती अभिषेक बनर्जी ने बागी नेताओं को खुली चुनौती देते हुए कहा, जो लोग टीएमसी छोड़कर मुझे कोस रहे हैं और हार के लिए जिम्मेदार ठहरा रहे हैं, वे दीदी (ममता बनर्जी) के पास वापस आ जाएं। अगर वे ऐसा करते हैं, तो मैं एक घंटे के भीतर पार्टी से इस्तीफा दे दूंगा। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि उन्हें पता है कि बागी नेता कभी ऐसा नहीं करेंगे।

बीजेपी के साथ डील का आरोप अभिषेक ने बागी नेताओं पर बीजेपी के साथ मिलीभगत का आरोप लगाया है। उन्होंने दावा किया कि इन नेताओं ने केंद्रीय एजेंसियों (ED-CBI) से बचने के लिए बीजेपी से डील की है। उनका कहना है कि पार्टी छोड़ने, बागी गुट बनाने या बीजेपी में शामिल होने के बदले उन्हें सुरक्षा का आश्वासन दिया गया है, जिसके एवज में उन्हें सिर्फ अभिषेक बनर्जी पर निशाना साधने का टास्क दिया गया है।

लगातार झटकों से घिरी ममता टीएमसी के लिए मौजूदा समय बेहद चुनौतीपूर्ण बना हुआ है। हाल ही में वरिष्ठ नेता और विधायक मदन मित्रा ने सभी पदों से इस्तीफा दे दिया। इसके ठीक अगले दिन अभिनेत्री और राज्यसभा सांसद कोयल मल्लिक ने भी इस्तीफा दे दिया, जिससे राज्यसभा में टीएमसी सांसदों की संख्या घटकर 9 रह गई है। कोयल मल्लिक से पहले सुखेंदु शेखर रॉय, सुष्मिता देव और प्रकाश चिक बराइक भी पार्टी का साथ छोड़ चुके हैं।

लोकसभा में भी बड़ा संकट राज्यसभा ही नहीं, लोकसभा में भी टीएमसी के सामने अस्तित्व का संकट खड़ा हो गया है। काकोली घोष दस्तीदार की अगुवाई में 19 सांसदों ने नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) बनाने का दावा किया है और एनडीए को समर्थन देने का ऐलान किया है। इन बागियों में शताब्दी रॉय, रचना बनर्जी, सायनी घोष और यूसुफ पठान जैसे प्रमुख सांसद भी शामिल हैं, जिन्होंने लोकसभा अध्यक्ष को पत्र सौंपकर अलग गुट की मान्यता मांगी है।

2024 के लोकसभा चुनाव में 29 सीटें जीतने वाली ममता बनर्जी की पार्टी अब अपने ही नेताओं की बगावत के कारण दोतरफा दवाब में है। जहां एक ओर कानूनी मोर्चे पर विभाजन की कोशिशें तेज हैं, वहीं दूसरी ओर अभिषेक बनर्जी के इस बयान ने पार्टी के अंदरूनी कलह को सार्वजनिक कर दिया है।

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