TMC के बागी सांसदों का NCPI में विलय मंजूर, संसद की पांचवीं सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी नई ताकत
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नई दिल्ली: राजनीति में एक बड़े घटनाक्रम के तहत, तृणमूल कांग्रेस (TMC) से बगावत करने वाले सांसदों के नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) में विलय को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने औपचारिक मंजूरी दे दी है। इस फैसले के बाद NCPI संसद में रातों-रात एक बड़ी राजनीतिक ताकत बनकर उभरी है।

सर्वदलीय बैठक का बुलावा संसद के आगामी मानसून सत्र को सुचारू रूप से चलाने के लिए सरकार ने 19 जुलाई को फ्लोर लीडर्स की एक सर्वदलीय बैठक बुलाई है। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने इस बैठक में शामिल होने के लिए NCPI के नेता सुदीप बंदोपाध्याय को आधिकारिक आमंत्रण भेजा है। यह सरकार की ओर से NCPI को मिली पहली बड़ी मान्यता मानी जा रही है।

संसद में नई नियुक्तियां NCPI ने अपनी रणनीतिक स्थिति स्पष्ट करते हुए लोकसभा में अपने प्रमुख पदाधिकारियों की घोषणा कर दी है। सुदीप बंदोपाध्याय को लोकसभा में पार्टी का फ्लोर लीडर बनाया गया है, जबकि शताब्दी रॉय उपनेता और काकोली घोष दस्तीदार को मुख्य सचेतक (चीफ व्हिप) नियुक्त किया गया है। सुदीप बंदोपाध्याय ने दावा किया है कि अब वे ही संसद में असली तृणमूल का प्रतिनिधित्व करेंगे।

बिना चुनाव लड़े बनी पांचवीं बड़ी पार्टी हैरानी की बात यह है कि NCPI ने आज तक कोई भी लोकसभा चुनाव नहीं जीता है। पिछले साल त्रिपुरा विधानसभा चुनाव में पार्टी को केवल 822 वोट मिले थे। बावजूद इसके, TMC के 20 बागी सांसदों के शामिल होने से यह अचानक लोकसभा की पांचवीं सबसे बड़ी पार्टी बन गई है। एनडीए (NDA) गठबंधन में यह भाजपा के बाद दूसरी सबसे बड़ी सहयोगी पार्टी के रूप में स्थापित हो गई है, जो टीडीपी (16) और जेडीयू (12) से भी बड़ी संख्या बल वाली पार्टी बन गई है।

अभिषेक बनर्जी ने जताया विरोध इस विलय को लेकर TMC में जबरदस्त आक्रोश है। पार्टी के महासचिव अभिषेक बनर्जी ने इस पूरे घटनाक्रम को असंवैधानिक करार दिया है। उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष से मुलाकात कर दलबदल विरोधी कानून (दसवीं अनुसूची) के तहत इन सांसदों को अयोग्य घोषित करने की मांग की है।

अब सबकी निगाहें 20 जुलाई से शुरू होने वाले मानसून सत्र पर टिकी हैं, जहां यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या TMC के बागी सांसद सदन में अपनी नई पहचान का इस्तेमाल किस तरह करते हैं।

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