सोनम वांगचुक पर पुलिसिया कार्रवाई: संजय राउत ने कहा- यह तानाशाही और ध्यान भटकाने की साजिश
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नीट (NEET) पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर पर 21 दिनों से अनशन कर रहे पर्यावरणविद् सोनम वांगचुक को शनिवार को दिल्ली पुलिस ने जबरन अस्पताल में भर्ती करा दिया। इस घटना के बाद देश की सियासत गरमा गई है।

संजय राउत का तीखा हमला शिवसेना (यूबीटी) के राज्यसभा सांसद संजय राउत ने इस कार्रवाई को तानाशाही करार दिया है। राउत ने कहा कि दिल्ली पुलिस पूरी तरह से सरकार की गुलाम बन चुकी है। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर सरकार को वांगचुक की चिंता थी, तो 21 दिनों तक उनकी मांगों पर कोई बातचीत क्यों नहीं की गई?

उद्धव ठाकरे के आंदोलन से ध्यान भटकाने की कोशिश? संजय राउत ने इस कार्रवाई को सीधे तौर पर महाराष्ट्र की राजनीति से जोड़ दिया है। राउत का दावा है कि नागपुर में उद्धव ठाकरे के नेतृत्व में होने वाले राम रक्षा आंदोलन से जनता और मीडिया का ध्यान भटकाने के लिए यह साजिश रची गई है। उन्होंने कहा कि अयोध्या राम मंदिर में हुए कथित भ्रष्टाचार के खिलाफ उद्धव ठाकरे का बड़ा आंदोलन शुरू होने वाला है, जिसे दबाने के लिए जानबूझकर यह मुद्दा खड़ा किया गया।

शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग पर चुप्पी सोनम वांगचुक लंबे समय से केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। राउत ने कहा कि लाखों छात्रों का भविष्य दांव पर लगा है, लेकिन सरकार समस्या हल करने के बजाय विरोध करने वालों की आवाज को डंडे के जोर पर दबा रही है। उन्होंने केंद्र सरकार पर असंवेदनशीलता का गंभीर आरोप लगाया है।

सुप्रिया सुले ने भी जताई चिंता इससे पहले एनसीपी (शरदचंद्र पवार) की सांसद सुप्रिया सुले ने भी जंतर-मंतर पहुंचकर सोनम वांगचुक से मुलाकात की थी। उन्होंने वांगचुक के बिगड़ते स्वास्थ्य को देखते हुए उनसे अनशन समाप्त करने की अपील की थी। सुले ने सरकार के रुख को बेहद असंवेदनशील बताते हुए कहा था कि सरकार को अहंकार छोड़कर प्रदर्शनकारियों से संवाद करना चाहिए।

सरकार की रणनीति फेल होने का दावा संजय राउत ने स्पष्ट कर दिया है कि सरकार चाहे कितनी भी साजिशें कर ले, शिवसेना (यूबीटी) अपने आंदोलन से पीछे नहीं हटेगी। उद्धव ठाकरे का नागपुर दौरा तय कार्यक्रम के अनुसार जारी है, और पार्टी का एल्गार आंदोलन पूरे जोर-शोर से जारी रहेगा। वांगचुक की गिरफ्तारी या अस्पताल में भर्ती किए जाने के बाद अब इस मुद्दे पर विपक्ष के और अधिक आक्रामक होने की संभावना है।

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