संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में भारत की 2028-29 की अस्थायी सदस्यता के लिए दावेदारी न केवल कूटनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह वैश्विक राजनीति में मजहबी गुटबाजी की पोल भी खोल रही है। भारत का मुकाबला ताजिकिस्तान से है, जो OIC (इस्लामिक सहयोग संगठन) का सदस्य है। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार इस्लामिक एकजुटता का बुलबुला भारत के प्रभाव के सामने फूट सकता है।
पाकिस्तान के पूर्व राजनयिक अब्दुल बासित ने एक चौंकाने वाला बयान दिया है। बासित का मानना है कि UNSC की वोटिंग में इस्लामिक देश एकजुट होकर भारत का विरोध नहीं करेंगे। उनके अनुसार, अफ्रीका के कई मुस्लिम बहुल देश भारत के पक्ष में मतदान कर सकते हैं, क्योंकि उनके साथ भारत के आर्थिक और कूटनीतिक संबंध ताजिकिस्तान की तुलना में कहीं अधिक मजबूत हैं। यह बयान पाकिस्तान की उस हताशा को दर्शाता है जो मजहब के नाम पर भारत को घेरने की कोशिश करती है।
OIC में 57 सदस्य देश हैं, जिनका संयुक्त राष्ट्र में लगभग 30% वोट बैंक है। हालांकि, भारत ने बीते 18 वर्षों में भारत-अफ्रीका फोरम के जरिए अपनी स्थिति मजबूत की है। भारत ने वहां 6 लाख 37 हजार करोड़ रुपये का निवेश किया है और आपदाओं के समय हर संभव मदद पहुंचाई है। फिलिस्तीन जैसे देशों द्वारा भी भारत के समर्थन का संकेत देना यह साबित करता है कि मजहब से ऊपर अब राष्ट्रीय हित और विकास की प्राथमिकता है।
भारत ने अपनी दावेदारी के लिए शांति विजन का एजेंडा पेश किया है। इसमें मुख्य रूप से ग्लोबल साउथ के देशों की आवाज को बुलंद करना, आतंकवाद के खिलाफ कठोर कदम उठाना और समुद्री सुरक्षा को प्राथमिकता देना शामिल है। UNSC में अस्थायी सदस्यता के लिए 193 सदस्य देशों में से दो-तिहाई (129) वोटों की दरकार है। भारत का ट्रैक रिकॉर्ड रहा है कि वह अब तक 8 बार अस्थायी सदस्य रह चुका है, जो उसकी जीत की संभावनाओं को पुख्ता करता है।
अस्थायी सदस्यता भारत को कई विशेष अधिकार देगी, जो सीधे तौर पर राष्ट्रीय सुरक्षा और वैश्विक प्रभाव से जुड़े हैं:
नेहरू के शब्दों में कहें तो भारत की यह दावेदारी केवल अपना कद बढ़ाने के लिए नहीं, बल्कि दुनिया में शांति और स्थिरता के लिए भारत की भूमिका को सुनिश्चित करने की एक बड़ी कूटनीतिक कोशिश है। अब देखना यह है कि क्या आने वाले समय में वैश्विक राजनीति में मजहबी सोच वाकई विकास की सोच के सामने सरेंडर कर देगी।
#DNAमित्रों | भारत के सामने मजहबी सोच का सरेंडर !..UNSC चुनाव पर मुस्लिम देश कैसे बंटे?
— Zee News (@ZeeNews) July 18, 2026
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