शिवसेना के विलय को हरी झंडी, टीएमसी के 20 बागियों की राह में आखिर क्या है कानूनी पेंच?
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नई दिल्ली: संसद के मॉनिटरिंग सत्र से ठीक पहले लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने दलों की स्थिति को लेकर एक सूची जारी की है, जिसने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। इस सूची में उद्धव ठाकरे की शिवसेना (UBT) से टूटकर एकनाथ शिंदे गुट में शामिल हुए 6 सांसदों के विलय को आधिकारिक मंजूरी मिल गई है, जिससे शिंदे गुट के सांसदों की कुल संख्या 13 हो गई है।

टीएमसी बागियों का अधूरा सफर

शिवसेना के उलट, ममता बनर्जी की पार्टी टीएमसी से बगावत करने वाले 20 सांसदों का मामला फिलहाल अधर में लटका है। इन बागी सांसदों ने नेशनल सिटीजंस पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) में अपने विलय का प्रस्ताव स्पीकर को सौंपा था, लेकिन लोकसभा सचिवालय की सूची में ये अभी भी टीएमसी सांसद के तौर पर ही दर्ज हैं। हालांकि, उनके नाम के साथ ‘$’ का चिह्न लगाकर यह स्पष्ट किया गया है कि मर्जर की प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हुई है।

दोहरे मापदंड का आरोप

टीएमसी की राज्यसभा सांसद सागरिका घोष ने इस स्थिति पर तीखे सवाल उठाए हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि एक तरफ सरकार इन 20 बागियों को सर्वदलीय बैठक में NCPI के प्रतिनिधि के रूप में आमंत्रित कर रही है, तो दूसरी तरफ लोकसभा के आधिकारिक रिकॉर्ड में वे अभी भी टीएमसी सदस्य ही हैं। उन्होंने इसे दोनों तरफ से खेलने की कोशिश करार दिया है।

स्पीकर क्यों फूंक-फूंक कर रख रहे कदम?

सूत्रों के मुताबिक, लोकसभा स्पीकर ओम बिरला इस मामले में कोई भी जल्दबाजी नहीं करना चाहते। दलबदल कानून की जटिलताओं को देखते हुए स्पीकर इस मामले में ठोस कानूनी राय ले रहे हैं। उन्होंने टीएमसी के संसदीय दल के नेता अभिषेक बनर्जी के पक्ष को भी सुना है। जानकारों का मानना है कि केवल दो-तिहाई बहुमत होना ही काफी नहीं है, बल्कि राजनीतिक विलय की प्रक्रिया में कई तकनीकी और कानूनी पहलुओं का पालन करना अनिवार्य है।

क्या 20 तारीख को बढ़ेगी टीएमसी की मुश्किलें?

भले ही तकनीकी रूप से विलय की मान्यता अभी लंबित है, लेकिन बागी गुट को लोकसभा में अलग बैठने की जगह और एक कार्यालय आवंटित कर दिया गया है। पूर्व टीएमसी नेता और अब एनसीपीआई से जुड़े रिजु दत्ता का दावा है कि उनके गुट को एक अलग राजनीतिक दल के तौर पर मान्यता मिल चुकी है।

अब सबकी नज़रें संसद के मॉनसून सत्र पर टिकी हैं। सायोनी घोष और यूसुफ पठान जैसे बड़े नामों वाले इस बागी गुट का रुख क्या होगा और स्पीकर का अंतिम फैसला क्या होगा, यह आने वाले दिनों में स्पष्ट हो जाएगा।

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