लखनऊ के प्रतिष्ठित किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) में इन दिनों खान-पान को लेकर बड़ा विवाद छिड़ गया है। यूनिवर्सिटी प्रशासन ने अपने सभी हॉस्टलों में मांसाहारी भोजन पकाने पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है। यह कदम राज्यपाल आनंदीबेन पटेल की एक टिप्पणी के बाद उठाया गया है, जिसके बाद से छात्रों, शिक्षकों और राजनीतिक दलों के बीच बहस तेज हो गई है।
राज्यपाल के सख्त रुख के बाद लिया फैसला विवाद की शुरुआत 14 जुलाई को KGMU के दीक्षांत समारोह के दौरान हुई। कुलाधिपति और राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने अपने संबोधन में कैंपस के हॉस्टल्स में नॉन-वेज खाना बनने पर नाराजगी जताई थी। इसके तुरंत बाद केजीएमयू प्रशासन हरकत में आया और वाइस-चांसलर डॉ. सोनिया नित्यानंद ने एक टास्क फोर्स का गठन कर हॉस्टलों को सख्त एडवाइजरी जारी कर दी।
क्या है प्रशासन का रुख? KGMU के प्रवक्ता डॉ. कुमार शांतनु ने स्पष्ट किया कि यूनिवर्सिटी द्वारा संचालित 18 मेस में वैसे भी नॉन-वेज नहीं परोसा जाता है। समस्या उन दो-तीन प्राइवेट मेस की थी, जिन्हें छात्र को-ऑपरेटिव आधार पर चलाते थे। अब उन्हें भी नॉन-वेज न पकाने के निर्देश दिए गए हैं। हालांकि, छात्रों को बाहर से नॉन-वेज खाना ऑर्डर करने या लाने की पूरी आजादी दी गई है।
खाने पर तानाशाही : सपा और फैकल्टी का विरोध इस फैसले को समाजवादी पार्टी ने तानाशाही फरमान करार दिया है। सपा प्रवक्ता आशुतोष वर्मा ने कहा कि मेडिकल जैसे संस्थान में जहां देश का सबसे बेहतरीन दिमाग आता है, वहां इस तरह के दकियानूसी आदेश थोपना गलत है। वहीं, केजीएमयू की एक सीनियर फैकल्टी ने सवाल उठाया कि क्या डॉक्टरों को मरीजों को अंडा या प्रोटीन युक्त आहार न लेने की सलाह देनी चाहिए?
धार्मिक और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की राय अलग इस्लामिक स्कॉलर मौलाना खालिद रशीद फिरंगी महली ने इस फैसले पर निराशा जताते हुए कहा कि 61% भारतीय नॉन-वेज खाते हैं और मेडिकल नजरिए से यह सेहत के लिए फायदेमंद है। दूसरी ओर, तपस्वी छावनी के पीठाधीश्वर जगत गुरु परमहंसचार्य ने राज्यपाल के फैसले का स्वागत करते हुए इसे भविष्य के लिए सही कदम बताया।
क्या आगे और भी संस्थान बदलेंगे मेन्यू? यह पहली बार नहीं है जब राज्यपाल ने मेडिकल संस्थानों के मेस मेन्यू पर सवाल उठाए हैं। इससे पहले 15 जून को राम मनोहर लोहिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (RMLIMS) में भी उन्होंने हफ्ते में दो बार नॉन-वेज परोसे जाने पर आपत्ति जताई थी। संकेत मिल रहे हैं कि अब RMLIMS समेत अन्य मेडिकल संस्थानों में भी खान-पान नीति को लेकर बदलाव किए जा सकते हैं।
*अयोध्या, उत्तर प्रदेश: तपस्वी छावनी के पीठाधीश्वर जगत गुरु परमहंसचार्य ने केजीएमयू के सभी हॉस्टलों में मांसाहारी भोजन पर प्रतिबंध लगने पर कहा, आनंदीबेन पटेल का यह जो फैसला है, इसका हम लोग स्वागत करते हैं। ये फैसला उनका बहुत ही अच्छा है। बच्चें मांसाहार करें, फिर नशा करें, उससे… pic.twitter.com/rHXhEefOmP
— IANS Hindi (@IANSKhabar) July 15, 2026
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